रेवाड़ी के लाल ने किया कमाल: रेतीले धोरों में उगाया ‘सोना’, राष्ट्रपति भवन तक गूंजी Yashpal Khola की सफलता!

Rewari News Today रेवाड़ी । हरियाणा के रेवाड़ी जिले की पहचान अक्सर वीरों की भूमि के रूप में होती है, लेकिन इसी मिट्टी के एक युवा लाल ने अब खेती की दुनिया में भी रेवाड़ी का झंडा बुलंद कर दिया है। यह कहानी है Yashpal Khola की, जिन्होंने परंपरागत खेती की लकीर को पीटते रहने के बजाय अपनी रेतीली ज़मीन पर प्राकृतिक कृषि का ऐसा सफल मॉडल खड़ा किया है, जिसने देश के बड़े-बड़े कृषि वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। यशपाल ने साबित कर दिया है कि, अगर सोच आधुनिक हो और इरादे नेक, तो बंजर और रेतीली ज़मीन से भी सुनहरी कामयाबी हासिल की जा सकती है। Rewari Farmer Success Story, Natural Farming Haryana 

Yashpal Khola: मंच पर दहाड़ और खेत में मेहनत

यशपाल खोला को जब आप किसी मंच पर बोलते हुए देखते हैं, तो उनकी आवाज़ में वो खनक और आत्मविश्वास नज़र आता है, जो किसी बड़े राजनेता या वक्ता में होता है। लेकिन यह आत्मविश्वास किताबी नहीं है, बल्कि खेत की मिट्टी से निकला हुआ अनुभव है। रेतीली ज़मीन पर जहां खेती को अक्सर घाटे का सौदा मानकर युवा शहरों की ओर भाग रहे हैं, वहां यशपाल ने बिना किसी रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों के खेती का सफल गणित सुलझा दिया है। कम लागत में अधिक मुनाफ़ा कैसे कमाया जाता है, आज रेवाड़ी का यह किसान पूरे देश को सिखा रहा है। Aravalli Kisan Club

अरावली किसान क्लब: एक नई क्रांति का आधार

यशपाल की इस सफलता के पीछे धारुहेड़ा नैचुरल एग्रो फार्म और अरावली किसान क्लब की मेहनत छिपी है। उन्होंने केवल खुद को सफल नहीं बनाया, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जहां हज़ारों किसान आकर ट्रेनिंग लेते हैं। Yashpal Khola का मानना है कि, किसान की सबसे बड़ी कमजोरी बिचौलियों पर निर्भरता है। इसलिए उन्होंने मार्केटिंग का एक ऐसा मज़बूत मॉडल विकसित किया, जिससे किसानों की उपज सीधे सही दाम पर मिले। आज हज़ारों किसान उनके इस मॉडल से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं और अपनी मिट्टी की सेहत भी बचा रहे हैं। President Awardee Farmer

राष्ट्रपति से मिला सम्मान, वैज्ञानिक भी हुए मुरीद 

यशपाल खोला के नवाचारों ने केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि देश के बड़े कृषि संस्थानों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। उनकी व्यावहारिक समझ का लोहा मानते हुए विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों ने उन्हें अपने मंचों पर आमंत्रित किया है। एक साधारण किसान के लिए यह गर्व की बात है कि, उसका अनुभव वैज्ञानिकों के शोध का हिस्सा बन रहा है। उनकी इसी लगन का नतीजा है कि, उन्हें किसान रत्न अवार्ड, राष्ट्रपति भवन में एट होम प्रोग्राम में सम्मान और नवोन्मेषी किसान सम्मान जैसे बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया है। वे आज कई सरकारी कृषि समितियों के सदस्य हैं, जहां वे खेती की नीतियां बनाने में अपना सुझाव देते हैं।

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