Mid Day Meal Rajasthan: 23-24 अप्रैल को प्रदेशभर के स्कूलों की होगी सघन जांच, गबन मिला तो खैर नहीं 

Mid Day Meal Rajasthan/School Inspection जयपुर/दौसा । राजस्थान की भजनलाल सरकार ने सरकारी स्कूलों में चल रही कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी मिड-डे मील और पन्नाधाय बाल गोपाल योजना को लेकर अब राज्य सरकार सीधे ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। 23 और 24 अप्रैल को राजस्थान के सभी जिलों में एक साथ विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कागजी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को खत्म करना है। Mid Day Meal Rajasthan, Panna Dhai Bal Gopal Yojana

एसीएच ने थमाया अफसरों को ‘सघन निरीक्षण’ का जिम्मा

स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के निर्देश पर इस अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत दौसा जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा सहित प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में अफसरों की टीमें तैनात कर दी हैं। निरीक्षण दलों में एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह दल सुबह 7.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक स्कूलों में मौजूद रहकर भोजन की गुणवत्ता और दूध वितरण की व्यवस्था देखेंगे। Education Department Rajasthan News

भेदभाव मुक्त शिक्षा पर सरकार का कड़ा रुख

इस बार के निरीक्षण अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, सरकार केवल भोजन के स्वाद तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि, वे यह सुनिश्चित करें कि मध्यान्ह भोजन के दौरान विद्यार्थियों के साथ जाति, धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव तो नहीं हो रहा है। निरीक्षण प्रपत्र में इस बिंदु को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। सरकार की मंशा साफ है कि, स्कूल में हर बच्चा एक समान सम्मान और पोषण का हकदार है। किसी भी तरह की ऊंच-नीच पाए जाने पर संबंधित संस्था प्रधान और स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई तय है।

दूरस्थ और दुर्गम स्कूलों पर विशेष फोकस

निरीक्षण के लिए स्कूलों के चयन में पारदर्शिता रखने के लिए एक विशेष मापदंड तय किया गया है। प्रदेश के कुल स्कूलों में से रैंडम आधार पर कम से कम 20 प्रतिशत स्कूलों को चुना गया है। इनमें से भी 20 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जो दुर्गम या दूरस्थ इलाकों में स्थित हैं, जहां अक्सर मॉनिटरिंग कम हो पाती है। साथ ही उन स्कूलों को प्राथमिकता दी गई है जहां पिछले दो सालों से कोई अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचा। खास बात यह है कि, इस दायरे में केवल सामान्य राजकीय विद्यालय ही नहीं, बल्कि संस्कृत स्कूल और मदरसे भी शामिल किए गए हैं। Rajesh Yadav ACS Education

भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ बड़ी चेतावनी

यह अभियान केवल एक रूटीन जांच नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सरकार की बड़ी चेतावनी है। मिड-डे मील में अक्सर गबन और घटिया सामग्री की शिकायतें आती रहती हैं। पन्नाधाय बाल गोपाल योजना के तहत दिए जाने वाले दूध की शुद्धता भी एक बड़ा मुद्दा रहा है।

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