उत्तराखंड का यह इलाका कहलाता है Mini Switzerland, यहां पहली बार पांडवों को मिले थे शिव भगवान, जानिए पूरी कहानी

Chopta Uttarakhand/Mini Switzerland रुद्रप्रयाग । देवभूमि उत्तराखंड अपनी गोद में न जाने कितने रहस्य और अलौकिक सौंदर्य समेटे हुए है। इन्हीं में से एक बेहद खूबसूरत और आध्यात्मिक स्थल है ‘चोपता’। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित यह छोटा सा इलाका आज दुनिया भर में अपनी हरियाली और मखमली घास के मैदानों के कारण ‘भारत के मिनी स्विट्जरलैंड’ के रूप में विख्यात हो चुका है। लेकिन चोपता की पहचान सिर्फ इसके प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध द्वापर युग और महाभारत काल के पांडवों से जुड़ा है। (Chopta Uttarakhand, Mini Switzerland, Tungnath Temple Story, Pandavas Lord Shiva, Travel News, News Voice India)

पांडवों और महादेव की अलौकिक कथा

धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध के बाद पांडव अपने ही भाइयों की हत्या के पाप से मुक्ति चाहते थे। भगवान श्रीकृष्ण की सलाह पर वे भगवान शिव की खोज में हिमालय की ओर निकल पड़े। कहा जाता है कि, महादेव पांडवों से रुष्ट थे और उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बैल का रूप धारण कर लिया और गुप्तकाशी में जाकर छिप गए।

जब धरती में समाने लगे थे शिव भगवान 

पांडवों ने जब उन्हें पहचान लिया, तो महादेव धरती में समाने लगे। उस समय भीम ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें आज हम ‘पंच केदार’ के रूप में पूजते हैं। इसी क्रम में चोपता के ठीक ऊपर स्थित तुंगनाथ वह पावन स्थान है, जहां भगवान शिव की ‘भुजाएं’ (बाहु) प्रकट हुई थीं। पांडवों ने ही यहाँ पहली बार महादेव के उस दिव्य रूप के दर्शन किए और उनकी पूजा अर्चना कर पापों से मुक्ति पाई। आज भी यहां स्थित तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर होने का गौरव प्राप्त है।

प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा संगम

चोपता की वादियां समुद्र तल से करीब 2680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। यहां के विशाल बुग्याल (घास के मैदान) और घने जंगलों के बीच से जब सूरज की किरणें छनकर आती हैं, तो नजारा बिल्कुल स्विट्जरलैंड जैसा प्रतीत होता है। यहां की शांति और शुद्ध हवा सैलानियों को एक अलग ही मानसिक सुकून प्रदान करती है। चोपता से शुरू होने वाला तुंगनाथ ट्रैक लगभग 4 से 5 किलोमीटर का है, जो बुरांश और देवदार के घने जंगलों से होकर गुजरता है।

जो लोग एडवेंचर के शौकीन हैं, उनके लिए यहां का ‘चंद्रशिला शिखर’ किसी चुनौती से कम नहीं है। तुंगनाथ मंदिर से महज एक किलोमीटर की और चढ़ाई करने के बाद आप चंद्रशिला पहुंचते हैं, जहां से हिमालय की गगनचुंबी चोटियां जैसे नंदा देवी, त्रिशूल और चौखंबा का 360 डिग्री व्यू मिलता है। यह अनुभव इतना दिव्य होता है कि यहां पहुंचने के बाद हर कोई अपनी थकान भूल जाता है।

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