Haryana Mid-Day Meal Update चंडीगढ़ । हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए मिड-डे मील को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और व्यावहारिक फैसला लिया है। अक्सर गैस सिलेंडर की सप्लाई में देरी होने के कारण स्कूलों में बच्चों के खाने पर संकट मंडराने लगता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। मौलिक शिक्षा निदेशालय (हरियाणा) ने निर्देश जारी किए हैं कि, यदि किसी स्कूल में एलपीजी सिलेंडर समय पर नहीं पहुंच पाता, तो स्कूल प्रबंधन लकड़ी के चूल्हे का उपयोग करके भोजन तैयार कर सकता है। Haryana News, education news haryana, haryana hindi news
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
हरियाणा के कई ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से शिकायतें आ रही थीं कि, गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर की आपूर्ति (Supply) में देरी होने के कारण मिड-डे मील बनाने में बाधा आ रही है। चूंकि मिड-डे मील योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषण देना और उनकी उपस्थिति बढ़ाना है, इसलिए शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि संसाधनों की कमी के चलते छात्रों का भोजन रुकना नहीं चाहिए। विभाग का कहना है कि ‘भूख’ और ‘शिक्षा’ के बीच कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। Mid Day Meal News Haryana
शिक्षा विभाग के नए निर्देश: क्या करना होगा स्कूलों को?
निदेशालय द्वारा जारी पत्र में स्कूल मुखियाओं और प्रबंधन समितियों के लिए कुछ सख्त और स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।
एजेंसी से संपर्क: सिलेंडर खत्म होने की स्थिति में सबसे पहले संबंधित गैस एजेंसी से तुरंत संपर्क करना होगा और आपूर्ति सुनिश्चित करानी होगी।
लकड़ी का विकल्प: यदि एजेंसी से सिलेंडर मिलने में तकनीकी देरी होती है, तो स्कूल को तुरंत लकड़ी की व्यवस्था करनी होगी ताकि मिड-डे मील बिना किसी देरी के बन सके।
सुरक्षा सर्वोपरि: लकड़ी पर खाना बनाते समय बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखना होगा। धुएं से बच्चों को परेशानी न हो, इसके लिए रसोई घरों में वेंटिलेशन का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है।
सिर्फ खाना नहीं, सेहत और शिक्षा का सवाल
जीरो टॉलरेंस: सरकार ने संदेश दिया है कि, मिड-डे मील योजना में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी मंजूर नहीं है। Haryana Education Department LPG
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ग्रामीण परिस्थितियों का समाधान: शहरों में गैस मिलना आसान है, लेकिन हरियाणा के गांवों में सप्लाई चेन टूटने पर लकड़ी ही सबसे सुलभ विकल्प है। सरकार ने अब इस पारंपरिक तरीके को ‘आधिकारिक मान्यता’ दे दी है।
ड्रॉपआउट पर लगाम: कई गरीब बच्चे स्कूल सिर्फ खाने के भरोसे आते हैं। यदि खाना नहीं मिलता, तो उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। यह आदेश उन बच्चों की शिक्षा को सुरक्षित करता है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की राय
हालांकि, शिक्षा विभाग इसे एक समाधान मान रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, स्कूलों में लकड़ी के चूल्हे का उपयोग ‘धुआं रहित रसोई’ के अभियान को थोड़ा पीछे धकेल सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि, स्कूलों में हमेशा एक बफर स्टॉक (अतिरिक्त सिलेंडर) रखना चाहिए ताकि लकड़ी जलाने की नौबत ही न आए।
बच्चों की थाली नहीं रहेगी खाली
हरियाणा सरकार का यह कदम लचीलेपन (Flexibility) को दर्शाता है। यह सुनिश्चित करता है कि, सिस्टम की कमियों का खामियाजा मासूम बच्चों को न भुगतना पड़े। अब स्कूल गैस एजेंसी के भरोसे बैठने के बजाय वैकल्पिक साधनों से बच्चों का निवाला तैयार रख सकेंगे।
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