Engineers Lightning Action 10 March राजस्थान/हरियाणा | देश के बिजली सेक्टर को निजी हाथों में सौंपने की केंद्र सरकार की तैयारी के खिलाफ अब देश के साथ-साथ हरियाणा और राजस्थान के बिजली इंजीनियरों ने आर-पार की जंग का एलान कर दिया है। उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की नेशनल मीटिंग में सरकार को सीधी चेतावनी दी गई है कि, 10 मार्च को संसद के बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2025 पेश हुआ, तो पूरे देश के बिजली घर ‘इंकलाब’ के नारों से गूंज उठेंगे।
क्या है लाइटनिंग एक्शन की हुंकार?
देश के इंजीनियरों ने इस बार साधारण हड़ताल (Engineers Lightning Action 10 March) की बजाय लाइटनिंग एक्शन का रास्ता चुना है। यानी जैसे ही दिल्ली में संसद के भीतर इस बिल की चर्चा शुरू होगी, वैसे ही कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक और हरियाणा से लेकर जयपुर तक के बिजली कर्मचारी अपनी सीटों से उठकर सड़कों पर आ जाएंगे। वे अपने दफ्तरों, पावर हाउसों और प्रोजेक्ट साइट्स के बाहर एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। न्यूज वॉइस के सूत्रों के मुताबिक, इस आंदोलन का मकसद जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकार को यह बताना है कि, बिना पर्याप्त चर्चा और बिना सहमति के थोपे गए कानून बिजली क्षेत्र के भविष्य को अंधकार में डाल देंगे।
आम आदमी और किसान पर प्रभाव
महंगी बिजली: अगर बिजली सप्लाई का काम पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथ में गया, तो वे केवल मुनाफा देखेंगी। सरकारी सिस्टम कमजोर होने से आम आदमी के लिए बिजली के रेट बेतहाशा बढ़ सकते हैं।
किसानों की सब्सिडी: हरियाणा और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों में किसानों को मिलने वाली सस्ती बिजली इस नए बिल के आने से खतरे में पड़ सकती है। इंजीनियर इसी कॉर्पोरेट राज के खिलाफ खड़े हैं।
जबरन निजीकरण: केंद्र सरकार राज्यों पर दबाव बना रही है कि, वे अपनी सरकारी बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) को शेयर बाजार में लिस्ट करें और मैनेजमेंट प्राइवेट हाथों में दें। इसे जबरन थोपा गया निजीकरण बताया जा रहा है।
देहरादून में भरी हुंकार
देहरादून (Engineers Lightning Action 10 March) की इस महापंचायत में हरियाणा और राजस्थान का पक्ष मजबूती से रखा गया। हरियाणा का नेतृत्व हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविन्द्र घनघस ने किया। उनके साथ आशीष गौतम और जतिन जांगड़ा ने भी अपनी आवाज बुलंद की। रविन्द्र घनघस ने सीधा कहा कि हरियाणा और राजस्थान के बिजली कर्मचारी इस काले कानून के खिलाफ एक मंच पर हैं। हम अपने खून-पसीने से सींचे गए बिजली विभाग को निजी घरानों की जागीर नहीं बनने देंगे। रेवाड़ी एचवीपीएन एसडीओ माधव राव ने बताया कि, रेवाड़ी से लेकर सिरसा और अलवर से लेकर बीकानेर तक का एक-एक कर्मचारी पूरी तरह तैयार है।
वर्किंग ग्रुप पर सवाल
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी. रत्नाकर राव ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी को सरकार ने जो वर्किंग ग्रुप बनाया, उसमें सिर्फ उन लोगों को जगह दी गई, जो पहले से ही निजीकरण की वकालत करते रहे हैं। लाखों किसानों, उपभोक्ताओं और कर्मचारी संगठनों की आपत्तियों को कूड़ेदान में डाल दिया गया। यह लोकतंत्र के साथ भद्दा मजाक है।
ओपीएस-सरकारी संपत्तियों को बचाने की कवायद
पुरानी पेंशन: देशभर के बिजली कर्मचारी अपने बुढ़ापे की लाठी यानी ओपीएस बहाली की मांग को लेकर इस संघर्ष को तेज कर रहे हैं।
जमीनों की सुरक्षा: उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की करोड़ों की जमीन निजी बिल्डरों को सौंपने के फैसले का पुरजोर विरोध किया गया।
इसका असर: यूपी में निजीकरण के खिलाफ पिछले 466 दिनों से जारी आंदोलन अब पूरे उत्तर भारत के कर्मचारियों के लिए मशाल बन चुका है।
अब 10 मार्च को होगा शक्ति प्रदर्शन
न्यूज वॉइस रिपोर्टर ने ग्राउंड जीरो पर बिजली विभाग के प्रतिनिधियों से बात की है, 10 मार्च की तारीख अब एक बड़े लोकतांत्रिक टकराव की गवाह बनेगी। इंजीनियरों का यह प्रदर्शन सरकार को यह याद दिलाने के लिए है कि, बिजली एक बुनियादी जरूरत है, मुनाफे का सौदा नहीं। सोनीपत से जेई रामकुमार ने बताया कि, उनकी टीम पूरी तरह प्रदर्शन यानी लाइटिंग एक्शन के लिए तैयार खड़ी है। रेवाड़ी से माधव राव एसडीओ भी पूरी तैयारी के साथ खड़े हैं। (Engineers Lightning Action 10 March) इधर जयपुर में भी लगातार इसी अभियान की चर्चा हो रही है। अब देखना होगा कि, दिल्ली की सरकार इस सामूहिक हुंकार के बाद क्या रुख अपनाती है।
बिजली निजीकरण के खिलाफ 10 बड़े आंदोलन
यूपी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति: करीब 2020 में यूपी में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ करीब 1.5 लाख बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया था। राज्य में ब्लैकआउट का खतरा पैदा हो गया था। यानी सरकार को लिखित आश्वासन देना पड़ा कि फिलहाल निजीकरण नहीं होगा।