Iran-Israel War नई दिल्ली/तेहरान | पश्चिम एशिया के धधकते रेगिस्तान से उठी जंग की लपटें अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने को बेताब हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष आज 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, कूटनीति के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है। भारत सरकार के सूचना एवं पत्र कार्यालय के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर इस विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए भारत की स्वतंत्र भूमिका की मांग की है। (PM Modi Iran Call)
ब्रिक्स अध्यक्ष भारत की ताकत का अहसास
ईरानी राष्ट्रपति का यह फोन कॉल ऐसे समय में आया है, जब भारत ब्रिक्स (BRICS) के अध्यक्ष के रूप में वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बना हुआ है। पेजेश्कियन ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि, वह अपनी वैश्विक साख का इस्तेमाल कर अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता पर लगाम लगाएं। यह केवल एक औपचारिक बातचीत नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि, जब दुनिया दो धड़ों में बंटी हो, तब रूस-यूक्रेन हो या ईरान-इजरायल हर कोई समाधान के लिए नई दिल्ली की ओर देखता है।
PM मोदी का कड़ा रुख: इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बर्दाश्त नहीं
फोन पर हुई इस लंबी वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने दो-टूक शब्दों में पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की निंदा की। पीएम मोदी का यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन हमलों का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा पर चिंता जताई। पीआईबी के मुताबिक, दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां नाकाबंदी होती है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। पीएम मोदी ने इस समुद्री मार्ग को खुला और सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
ईरान की शर्तें और रीजनल सिक्योरिटी का नया प्लान
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पीएम मोदी के सामने शांति बहाली के लिए अपनी शर्तें रखीं। ईरान क्या चाहता है, यह भी आपके लिए जानना जरूरी है, जिसके लिए पढिए नीचे की लाइनें। (West Asia Crisis, Global Oil Supply, India Independent Role)
- हमलों पर तुरंत रोक: अमेरिका और इजरायल अपने सैन्य अभियान फौरन बंद करें।
- सुरक्षा की गारंटी: भविष्य में दोबारा ऐसे हमले न होने का लिखित आश्वासन मिले।
- विदेशी हस्तक्षेप मुक्त ढांचा: पेजेश्कियन ने प्रस्ताव दिया कि, क्षेत्र के देश मिलकर अपना सुरक्षा तंत्र बनाएं, जिसमें अमेरिका जैसे बाहरी देशों की दखलअंदाजी न हो।
ईरानी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन के उन दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया कि, वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए हमला कर रहे हैं। उन्होंने इसे ईरान की संप्रभुता पर हमला करार दिया।