11 May ka itihas/11 May History in Hindi नई दिल्ली । इतिहास के पन्नों में 11 मई की तारीख भारत के लिए स्वाभिमान और आधुनिक शक्ति का प्रतीक है। आज ही के दिन सन 1998 में भारत ने राजस्थान के पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह दिन केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति का भी उत्सव है, जिसे हम राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाते हैं।
लेकिन, 11 मई का इतिहास सिर्फ परमाणु परीक्षण तक सीमित नहीं है; यह दिन एक अरबवीं आबादी के जन्म, सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों और कला जगत की महान हस्तियों के जन्म का भी साक्षी है। आइए, विस्तार से जानते हैं, 11 मई के उस रोमांचक इतिहास को जिसने भारत की तकदीर बदल दी। National Technology Day India, Pokhran 2 Nuclear Test 1998, 11 May History in Hindi news, Operation Shakti Pokhran
ऑपरेशन शक्ति: जब भारत बना परमाणु संपन्न राष्ट्र (1998)
11 मई 1998 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन राजस्थान के पोखरण रेगिस्तान में भारत ने तीन सफल परमाणु परीक्षण किए थे। इस पूरे मिशन का नाम ऑपरेशन शक्ति रखा गया था।
वैज्ञानिकों और नेतृत्व का कमाल
उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में इस मिशन को इतनी गोपनीयता से अंजाम दिया गया कि, दुनिया की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) को भी इसकी भनक नहीं लगी। भारत ने बिना किसी बाहरी मदद के अपनी स्वदेशी तकनीक का लोहा मनवाया। इन परीक्षणों के बाद भारत दुनिया का छठा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया। इस महान उपलब्धि की याद में ही हर साल 11 मई को पूरे देश में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) मनाया जाता है।
भारत की एक अरबवीं संतान: ‘आस्था’ का जन्म (2000)
11 मई 2000 को भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में एक बड़ा मोड़ आया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक बच्ची का जन्म हुआ, जिसका नाम आस्था रखा गया। आस्था को भारत का एक अरबवां (1 Billionth) बच्चा घोषित किया गया।
इस घटना ने एक ओर जहां चिकित्सा जगत में खुशी का माहौल पैदा किया, वहीं दूसरी ओर इसने देश की तेजी से बढ़ती आबादी पर व्यापक चर्चा छेड़ दी। सरकार और समाज के लिए यह एक संकेत था कि संसाधनों और जनसंख्या के बीच संतुलन बनाना कितना अनिवार्य है। आज आस्था भारत की उस विशाल युवा शक्ति का प्रतीक है, जो देश के भविष्य का निर्माण कर रही है।
न्यायपालिका के ऐतिहासिक फैसले और बदलाव (2010)
11 मई 2010 का दिन भारतीय न्यायपालिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। इस दिन सर्वोच्च न्यायालय से दो बड़ी खबरें आईं।
न्यायमूर्ति एस.एच. कपाड़िया का शपथ ग्रहण: राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने न्यायमूर्ति एस.एच. कपाड़िया को भारत के 38वें प्रधान न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल ईमानदारी और न्यायिक अनुशासन के लिए याद किया जाता है।
पंचायत चुनाव में आरक्षण पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनावों में आरक्षण देने का पूर्ण अधिकार है। इस फैसले ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाने का काम किया।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक संघर्ष
परमाणु अप्रसार संधि (1995): 11 मई 1995 को संयुक्त राष्ट्र में 24 दिनों तक चले गहन मंथन के बाद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को अनिश्चित काल के लिए स्थायी बना दिया गया। यह वैश्विक परमाणु राजनीति का एक बड़ा मोड़ था।
प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणाली पर भारत-अमेरिका सहयोग (2001): 2001 में आज ही के दिन भारत ने अमेरिका की मिसाइल डिफेंस सिस्टम का समर्थन किया, जिसने दोनों देशों के सामरिक रिश्तों में एक नई गर्माहट पैदा की।
बगलिहार परियोजना (2005): भारत और पाकिस्तान के बीच बगलिहार जल विद्युत परियोजना को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए विश्व बैंक ने एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति की थी।
11 मई: कला, साहित्य और शौर्य के सितारे (जन्म)
आज की तारीख ने कई ऐसी महान आत्माओं को जन्म दिया जिन्होंने अपनी प्रतिभा से समाज को समृद्ध किया।
मृणालिनी साराभाई (1918): भारत की विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना और पद्म भूषण से सम्मानित मृणालिनी साराभाई का जन्म आज ही हुआ था। उन्होंने भारतीय नृत्य कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक नई पहचान दी।
सआदत हसन मंटो (1912): उर्दू साहित्य के सबसे विवादित लेकिन सबसे प्रभावशाली कहानीकार मंटो का जन्म आज ही हुआ था। उनकी कहानियों ने समाज की कड़वी हकीकत को बिना किसी पर्दे के पेश किया।
सागर सरहदी (1933): भारतीय सिनेमा के दिग्गज पटकथा लेखक, जिन्होंने ‘कभी-कभी’ और ‘बाजार’ जैसी फिल्मों से शब्दों का जादू बिखेरा, उनका जन्म भी आज ही के दिन हुआ था।