RTE Admission नई दिल्ली | हरियाणा के उन लाखों अभिभावकों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है, जो अपने बच्चों को बड़े और नामी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने का सपना देखते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आती है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत सत्र 2026-27 के लिए मुफ्त दाखिला प्रक्रिया का बिगुल फूक दिया गया है। मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अल्टीमेटम जारी कर दिया है। न्यूज वॉइस के सूत्रों के मुताबिक, अब स्कूलों के पास सीटें छिपाने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। सभी स्कूलों को 17 मार्च तक अपने सीट डिक्लेरेशन पोर्टल पर खाली सीटों का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य है। विभाग ने दो टूक कहा है कि, जो स्कूल इस आदेश की अनदेखी करेंगे, उनकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी।
25% सीटों पर गरीब बच्चों का हक, पारदर्शिता के लिए ऑटो-सिस्टम लागू
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के नियमों के मुताबिक, हर प्राइवेट स्कूल को अपनी एंट्री लेवल क्लास (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी या पहली कक्षा) में कुल क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए आरक्षित रखना होता है। इस बार विभाग ने तकनीक का सहारा लिया है। जैसे ही स्कूल पोर्टल पर अपनी कुल सीटों की संख्या दर्ज करेंगे, सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से यह कैलकुलेट कर लेगा कि उस स्कूल में कितनी सीटें आरक्षित वर्ग के लिए खाली हैं। इससे स्कूलों द्वारा सीटों की संख्या कम बताने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
फर्जीवाड़ा करने वाले स्कूलों पर गिरेगी गाज: MIS पोर्टल होगा ब्लॉक
अक्सर देखा गया है कि दाखिलों से बचने के लिए कई स्कूल पोर्टल पर गलत जानकारी भर देते हैं या पुराने दस्तावेजों का सहारा लेते हैं। भास्कर न्यूज, रेवाड़ी को मिली जानकारी के अनुसार, विभाग इस बार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।
वैध एनओसी अनिवार्य: स्कूलों को केवल वही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) या मान्यता प्रमाण पत्र अपलोड करने होंगे, जो वर्तमान में वैध हैं।
सख्त कार्रवाई: यदि किसी स्कूल ने एक्सपायर हो चुके या जाली कागजात अपलोड किए, तो विभाग उनका MIS पोर्टल तुरंत बंद कर देगा, जिससे स्कूल का पूरा डिजिटल कामकाज ठप हो जाएगा।
बिना प्राइमरी विंग वाले स्कूलों के लिए भी कड़े नियम
ऐसे स्कूल जिनके पास पांचवीं कक्षा तक की विंग नहीं है, उन्हें भी पोर्टल पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो विभाग उनके प्राइमरी सेक्शन का लॉगिन हमेशा के लिए लॉक कर देगा। इसका मतलब यह है कि भविष्य में वे कभी भी छोटी कक्षाओं (Entry Level) के लिए आवेदन नहीं ले पाएंगे।
अधूरे आवेदन और तकनीकी सहायता
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि कई बार स्कूल फॉर्म तो भर देते हैं, लेकिन ‘फाइनल सबमिट’ करना भूल जाते हैं। ऐसे स्कूलों को ‘डिफाल्टर’ की सूची में डाला जाएगा। अल्पसंख्यक श्रेणी (Minority Category) का दावा करने वाले स्कूलों को भी अपना सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा।
हेल्पलाइन नंबर: यदि किसी स्कूल संचालक को तकनीकी दिक्कत आती है, तो वे विभाग के हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 पर संपर्क कर सकते हैं। याद रहे, 17 मार्च की डेडलाइन किसी भी सूरत में आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।