Rajasthan Politics News जयपुर । राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले की तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव ने भारतीय स्थानीय निकाय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। 35 सीटों वाली इस परिषद में महज 1 कांग्रेस और 3 भाजपा पार्षदों के बावजूद, 31 निर्दलीयों के बूते जो सियासी खेल रचा गया, उसने हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों से लेकर हरियाणा की सड़कों और राजस्थान के अदालती कमरों तक को हिलाकर रख दिया।
आखिरकार, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय रामावतार सैनी ने भाजपा समर्थित सुभाष चंद सैनी को महज 1 वोट के अंतर (18-16) से हराकर सभापति पद पर कब्जा जमाया। लेकिन इस जीत का रास्ता जितना सीधा दिखता है, इसका अंदरूनी गणित उतना ही पेचीदा रहा। आइए… जानते हैं इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे के 5 सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट्स और एक्सक्लूसिव एनालिसिस।
31 निर्दलीयों का किंगमेकर पावर… Rajasthan Politics News
तिजारा में कुल 35 में से 31 पार्षद निर्दलीय जीतकर आए थे। यह स्पष्ट था कि दलीय सिंबल (भाजपा या कांग्रेस) की ताकत यहां शून्य थी और पूरी बाजी निर्दलीयों के पाले में थी। कांग्रेस ने तुरंत दांव खेलते हुए निर्दलीय रामावतार सैनी को अपना चेहरा घोषित किया और 18 निर्दलीयों को हिमाचल के कसौल स्थित एक रिसॉर्ट में भेज दिया। वहीं, भाजपा ने भी 16 निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर रणनीति बनाई।
पंचकूला चौक: जब रास्ते में फंसा 20 घंटे का काफिला
कसौल से तिजारा लौटते वक्त कांग्रेस समर्थकों का काफिला हरियाणा के पंचकूला (टोल प्लाजा के पास) में एक बड़ी नाकेबंदी में फंस गया। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि, उन्हें बंधक बनाकर मतदान से रोकने की कोशिश की गई, जबकि महिला पार्षदों ने बंदूक की नोक पर दबाव बनाने और बस से जबरन उतारने के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, पंचकूला पुलिस का कहना था कि, वे केवल जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी की सूचना पर सामान्य जांच कर रहे थे।
राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…
जैसे ही कांग्रेस को लगा कि, उनके पार्षद समय पर तिजारा नहीं पहुंच पाएंगे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने हाईकोर्ट में आपातकालीन याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मतदान का समय रात 10 बजे तक बढ़ाने का अभूतपूर्व आदेश दिया।
एनालिसिस: अदालत का फैसला टर्निंग प्वाइंट?
अगर हाईकोर्ट मतदान का समय नहीं बढ़ाता, तो कसौल से आ रहे 18 पार्षद वोट डालने से वंचित रह जाते और बाजी बिना लड़े ही दूसरी तरफ चली जाती। यही अदालत का फैसला पूरे चुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
बस का शीशा टूटना और लाइव लोकेशन की भूमिका
समय सीमा बढ़ने के बाद कांग्रेस नेताओं ने अपने पार्षदों की लाइव लोकेशन ट्रैक की। पंचकूला के पास बस के अंदर बंद पार्षदों को जब बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला, तो बस का शीशा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। खिड़की से कूदते पार्षदों के वीडियो और तस्वीरों ने इस स्थानीय चुनाव को रातों-रात राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियों में ला दिया।