Iran-India Oil Trade 2026 नई दिल्ली | दुनिया के नक्शे पर जब भी ऊर्जा की राजनीति की बात होती है, तो भारत की भूमिका हमेशा संतुलित रही है। लेकिन साल 2026 के अप्रैल महीने में भारत ने जो कदम उठाया है, उसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि, नई दिल्ली अब किसी के दबाव में अपनी अर्थव्यवस्था के चक्के थमने नहीं देगी। सात साल के लंबे सूखे के बाद, भारत ने एक बार फिर ईरान से कच्चे तेल और LPG की खरीदारी शुरू कर दी है।
कूटनीति का नया ध्रुव
जब मध्य पूर्व के सुलगते हालात के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की घेराबंदी हुई, तो पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया। तेल की आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) टूटने की कगार पर थी। ऐसे में भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का परिचय देते हुए ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित किया। मंगलौर के पश्चिमी बंदरगाह पर लंगर डाले हुए 44,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले उस प्रतिबंधित पोत (Sanctioned Vessel) का पहुंचना केवल एक खेप का आना नहीं है, बल्कि यह भारत की नई विदेश नीति का ऐलान है।
क्यों बदला वैश्विक समीकरण?
मई 2019 के बाद से भारत ने अमेरिकी दबाव के कारण ईरान से एक बूंद तेल भी नहीं खरीदा था। लेकिन वर्तमान वैश्विक तेल संकट (Global Oil Crisis) ने समीकरण बदल दिए हैं। पिछले महीने जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने आपूर्ति की भारी कमी को देखते हुए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील (Temporary Waiver on Sanctions) दी, तो भारत ने बिना समय गंवाए अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना शुरू कर दिया। (India-Iran Oil Relations)
भारत के तेल मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि, अब भुगतान के तरीकों (Payment Mechanism) में कोई बाधा नहीं है। पहले जो बैंकिंग प्रतिबंधों का डर था, वह अब खत्म हो चुका है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों के लिए व्यापार सुगम हो गया है।
ऊर्जा सुरक्षा बनाम वैश्विक दबाव
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। हमारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति पर टिकी है। मंत्रालय का यह कहना कि “कंपनियों को व्यावसायिक हितों के आधार पर निर्णय लेने की पूरी छूट है”, यह दर्शाता है कि भारत अब ऊर्जा विविधीकरण (Energy Diversification) के मामले में किसी एक खेमे का पक्षधर नहीं है। हम रूस से भी तेल खरीद रहे हैं और अब ईरान से भी, क्योंकि हमारे लिए ‘इंडिया फर्स्ट’ की नीति सर्वोपरि है। (Indian Energy Security)