Iran US Conflict नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट के रणमैदान से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने दावा किया है कि, उसने अमेरिका के सबसे ताकतवर सुरक्षा कवच ‘पैट्रियट डिफेंस सिस्टम’ को धुआं-धुआं कर दिया है। अगर यह दावा सच है, तो इसका मतलब है कि युद्ध अब उस मोड़ पर आ गया है, जहां से वापसी का रास्ता नहीं बचता।
क्या है पूरा मामला? (Patriot Missile System)
बात शुरू हुई ईरान के बुशहर परमाणु प्लांट के पास हुए एक धमाके से, जिसमें ईरान का एक सुरक्षा गार्ड मारा गया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना और कुछ ही घंटों के भीतर ‘ओ हसन इब्न अली’ नाम से एक ऐसा ऑपरेशन छेड़ा जिसने अमेरिका के सैन्य ठिकानों की नींव हिला दी। ईरान की खतरनाक ‘हाज कासिम’ और ‘खेबर शेकान’ मिसाइलों ने आसमान से ऐसी आग बरसाई कि बहरीन में तैनात अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम और कुवैत में खड़ी ‘हिमार्स’ तोपें मलबे में तब्दील हो गईं। (Iran US War 2026)
पैट्रियट का गिरना क्यों है ‘वर्ल्ड वॉर’ जैसी घंटी? (Middle East Crisis)
पैट्रियट कोई मामूली हथियार नहीं है। यह अमेरिका की वो ‘सुरक्षा दीवार’ है जिसे दुनिया का सबसे भरोसेमंद मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। एक पैट्रियट मिसाइल की कीमत करीब 33 करोड़ रुपये (4 मिलियन डॉलर) होती है। यूक्रेन से लेकर इजरायल तक, यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों और विमानों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाना जाता है। (Bushehr Nuclear Plant)
ईरान ने अगर इसे भेद दिया है, तो इसके तीन बड़े मतलब…
अमेरिकी साख को चोट: जो सिस्टम पूरी दुनिया को सुरक्षा की गारंटी देता था, वह खुद अपनी रक्षा नहीं कर पाया।
ईरानी तकनीक का जलवा: ईरान की नई मिसाइलें अब इतनी एडवांस हो चुकी हैं कि वे दुनिया के सबसे महंगे रडार को भी चकमा दे सकती हैं।