निजी स्कूलों की लूट पर एडवोकेट का कड़ा रुख, शिक्षा विभाग से की नियमों की पालना की मांग

Private School Fee Hike रेवाड़ी | नए शैक्षणिक सत्र का आगाज होते ही निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की जेब पर डाका डालने की शिकायतें फिर से गरमाने लगी हैं। शिक्षा के नाम पर हो रही इस मुनाफाखोरी के खिलाफ अब रेवाड़ी के एडवोकेट कैलाश चन्द ने कानूनी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले स्कूलों पर नकेल कसने की अपील की है।

School Education Rules Violation- 1 अप्रैल से पहले एक्शन की तैयारी

एडवोकेट कैलाश चन्द ने शिक्षा विभाग के निदेशकों और प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र में स्कूल प्रबंधन नियमों के विरुद्ध जाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई स्कूल दाखिला फीस (Admission Fee), एनुअल चार्ज और स्मार्ट क्लास के नाम पर ऐसे शुल्क वसूल रहे हैं जिनकी अनुमति हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियमावली में नहीं है।

महंगी किताबों का बोझ और कमीशन का खेल

एडवोकेट के अनुसार, स्कूलों में सबसे बड़ा खेल किताबों को लेकर चल रहा है। एडवोकेट ने आरोप लगाया कि मुनाफाखोरी के चक्कर में कई स्कूल NCERT की सस्ती और प्रामाणिक किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बच्चों पर थोप रहे हैं। यह सीधे तौर पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण है।

SLC रोकना और ऑडिट न कराना गैर-कानूनी

एडवोकेट कैलाश चन्द ने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों का हवाला देते हुए कुछ प्रमुख बिंदु उठाए हैं।

प्रमाण पत्र (SLC): कोई भी स्कूल किसी बच्चे की स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र (SLC) नहीं रोक सकता।

खातों का ऑडिट: स्कूल अपने खातों का सही तरीके से ऑडिट नहीं करवा रहे हैं, जो शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन है।

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