World Suicide Prevention Day: क्या आप डिप्रेशन में तो नहीं? NCRB के आंकड़े देखकर कांप उठेगा आपका दिल, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

World Suicide Prevention Day नई दिल्ली । (सविता मीणा) क्या आपने कभी सोचा है कि, जब आप सुबह की चाय की चुस्की लेकर अखबार पढ़ रहे होते हैं, तब तक देश में दर्जनों घर हमेशा के लिए तबाह हो चुके होते हैं? एक ऐसी साइलेंट महामारी जो बिना किसी शोर और बिना किसी लॉकडाउन के हमारे हंसते-खेलते परिवारों को लील रही है। हम बात कर रहे हैं ‘आत्महत्या’ की। Tele MANAS Helpline Number, NCRB Suicide Report India, Signs of Depression and Suicide, Suicide Prevention Quotes and Theme

आज ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ (World Suicide Prevention Day) पर जब पूरी दुनिया मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा कर रही है, तब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की लेटेस्ट रिपोर्ट ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया’ के आंकड़े दिल नहला देने वाले हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, देश के भीतर एक साल में कुल 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की। इसका गणित समझें तो भारत में हर दिन औसतन 465 से अधिक लोग और हर एक घंटे में लगभग 19 लोग (यानी हर 3 मिनट में 1 इंसान) मौत को गले लगा रहे हैं।

इन 5 राज्यों से आ रहीं आधी मौतें, देखिए पूरी लिस्ट…

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, देश में होने वाली कुल आत्महत्याओं का लगभग 49% हिस्सा सिर्फ 5 राज्यों से आता है।

महाराष्ट्र (नंबर-1 पर): देश में सबसे ज्यादा 22,174 आत्महत्याएं महाराष्ट्र में दर्ज की गईं, जो कुल मामलों का 13% है।

तमिलनाडु: 19,965 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर (11.7% हिस्सेदारी)।

मध्य प्रदेश: 15,491 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर (9.1% हिस्सेदारी)।

कर्नाटक: 13,151 मामले (7.7% हिस्सेदारी)।

पश्चिम बंगाल: 12,931 मामले दर्ज किए गए (7.6% हिस्सेदारी)।

उत्तर प्रदेश का सच: देश की 17% आबादी वाले उत्तर प्रदेश में आत्महत्या के मामले तुलनात्मक रूप से काफी कम (9,180 मामले, यानी सिर्फ 5.4%) दर्ज किए गए।

सारणी से समझिए…

राज्य का नाम कुल आत्महत्या के मामले कुल मामलों में हिस्सेदारी (%)
महाराष्ट्र 22,174 13.0%
तमिलनाडु 19,965 11.7%
मध्य प्रदेश 15,491 9.1%
कर्नाटक 13,151 7.7%
पश्चिम बंगाल 12,931 7.6%
उत्तर प्रदेश 9,180 5.4%

हाउसवाइफ, स्टूडेंट्स और दिहाड़ी मजदूर सबसे बड़े शिकार…

गृहणियों का दर्द: कुल 45,245 महिला सुसाइड में से 22,113 सिर्फ हाउसवाइफ थीं। महिला सुसाइड में लगभग 48.9% हिस्सेदारी गृहणियों की है, जिनमें तमिलनाडु (2,821) और महाराष्ट्र (2,371) सबसे आगे हैं।

बेंगलुरु: 2,403 मामले (1.4% की बढ़ोतरी)।

चेन्नई व मुंबई: चेन्नई में 1,525 और मुंबई में 1,406 लोगों ने अपनी जान दी।

क्या है समाधान…

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर सुसाइड को रोका जा सकता है।

बातचीत शुरू करें: अपनों में अचानक आए बदलाव या उनके अकेलेपन पर उनसे खुलकर बात करें।

चेतावनी संकेतों को पहचानें: “अब जीने का मन नहीं है” जैसी बातों को मजाक में न लें।

प्रोफेशनल मदद लें: अवसाद या तनाव होने पर बिना हिचकिचाहट काउंसलर से मिलें।

सरकारी हेल्पलाइन नंबर (मुफ्त व 24 घंटे उपलब्ध)

यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या अवसाद से जूझ रहा है, तो कृपया इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

टेली-मानस (Tele-MANAS – भारत सरकार): 14416 या 1800-891-4416

किरण (KIRAN) हेल्पलाइन: 1800-599-0019

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