PM मोदी की इमरजेंसी मीटिंग: 13 मंत्री, डोभाल और 23 दिन की जंग; क्या मचेगा हड़कंप?

Iran-Israel War नई दिल्ली | जब दुनिया के नक्शे पर बारूद की गंध फैलती है, तो उसकी तपिश हज़ारों मील दूर भारत की रसोई और बाज़ारों तक पहुंचती है। एएनआई के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास पर हुई इमरजेंसी मीटिंग इसी खतरे को समय रहते भांपने की एक बड़ी कोशिश है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में जंग 23वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में पीएम मोदी ने अपने 13 सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजीत डोभाल के साथ घेराबंदी शुरू कर दी है। (PM Modi Emergency Meeting) (Petrol Diesel Supply Chain India)

बैठक का असली मकसद: केवल जंग नहीं…

सरकारी गलियारों में इस बैठक को समीक्षा बैठक कहा जा रहा है, लेकिन गहराई से देखें तो यह भारत की आर्थिक सुरक्षा को बचाने का मास्टरप्लान है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह से लेकर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी बताती है कि, सरकार किसी एक मोर्चे पर नहीं, बल्कि ‘मल्टी-लेवल’ खतरे से निपट रही है।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी ने भारत की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर यह समुद्री रास्ता बंद रहा, तो देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और महंगाई का ऐसा चक्रवात आ सकता है जिसे संभालना मुश्किल होगा। (India Energy Security)

13 मंत्रियों का वार रूम: कौन क्या संभाल रहा है?

इस बैठक में 13 मंत्रियों का होना यह संकेत देता है कि, सरकार हर सेक्टर को अलर्ट मोड पर रख रही है।

ऊर्जा और ईंधन: हरदीप पुरी और मनोहर लाल खट्टर को निर्देश दिए गए हैं कि, तेल और बिजली की सप्लाई लाइन में एक सेकंड का भी ब्रेक न आए।

खेती और खाद: शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी सबसे अहम है। मिडिल ईस्ट से आने वाले फर्टिलाइजर (खाद) की सप्लाई अगर रुकी, तो देश का किसान संकट में आ जाएगा। सरकार बफर स्टॉक की समीक्षा कर रही है।

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