Rajasthan News: NCERT की ऐतिहासिक भूल: जैसलमेर-बीकानेर को ‘मराठा’ बताने पर मचा घमासान, आखिर झुकना पड़ा!

Rajasthan News नई दिल्ली/जैसलमेर: शिक्षा जगत की सबसे बड़ी संस्था NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। मामला इतना गंभीर था कि सीधे राजस्थान के गौरवशाली इतिहास (History Blonder) और पूर्व राजपरिवारों की ‘पहचान’ पर बन आई थी। 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में एक ऐसा नक्शा छापा गया, जिसने इतिहास के जानकारों के होश उड़ा दिए। इस नक्शे में राजस्थान की रियासतों—जैसलमेर (Jaisalmer), बीकानेर और बूंदी—को मराठा (Maratha) साम्राज्य का हिस्सा दिखा दिया गया।

भारी विरोध और तथ्यों की कड़ाई के बाद, अब NCERT ने घुटने टेक दिए हैं और अपनी गलती स्वीकार करते हुए इस विवादित नक्शे को हटाने का फैसला किया है।

क्या थी वो ‘ब्लंडर’ वाली गलती?

NCERT की किताब में मराठा साम्राज्य के विस्तार को दर्शाने के लिए एक नक्शा शामिल किया गया था। इस नक्शे की सबसे बड़ी त्रुटि यह थी कि इसमें जैसलमेर जैसी स्वतंत्र रियासतों को भी मराठों के अधीन दिखा दिया गया।

ऐतिहासिक हकीकत क्या है? इतिहास गवाह है कि मराठों का प्रभाव उत्तर भारत में बहुत अधिक था, लेकिन थार के रेगिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जैसलमेर के भाटी शासकों के अदम्य साहस के कारण मराठा सेनाएं वहां कभी अपना शासन स्थापित नहीं कर पाईं। जैसलमेर हमेशा से एक स्वतंत्र और स्वाभिमानी रियासत के रूप में अस्तित्व में रही। इसे मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाना न केवल एक चूक थी, बल्कि इतिहास के साथ एक बड़ा अन्याय था।

राजपरिवारों ने खोला मोर्चा: यह हमारी पहचान का सवाल

जैसे ही यह किताब स्कूलों और शिक्षकों के हाथ में पहुँची, विरोध की लहर दौड़ गई। राजस्थान के प्रमुख पूर्व राजपरिवारों ने इसे अपनी विरासत पर हमला करार दिया:

विक्रम सिंह नाचना (जैसलमेर): उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा, यह महज एक नक्शे की गलती नहीं है, बल्कि हमारी पहचान मिटाने की कोशिश है। जैसलमेर कभी किसी के अधीन नहीं रहा।

विश्वराज सिंह मेवाड़ (उदयपुर) और सांसद महिमा कुमारी: इन्होंने सीधे केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के सामने इस मुद्दे को उठाया और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

विशेषज्ञों का कहना था कि इस तरह की गलत जानकारी से विद्यार्थियों के बीच भ्रम फैलता है और वे अपने ही गौरवशाली स्थानीय इतिहास की गलत व्याख्या करने लगते हैं।

NCERT का U-Turn: अब आगे क्या

चारों तरफ से घिरने के बाद NCERT ने मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा की और अपनी ‘ऐतिहासिक तथ्यात्मक त्रुटि’ (Historical Error) को स्वीकार किया। विभाग ने तुरंत ये सुधारात्मक कदम उठाए हैं:

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