IGU Meerpur में विद्यार्थी प्रदर्शन, मांगों को लेकर पुलिस से भिड़े छात्र, भ्रष्टाचार के आरोपों से हिला कैंपस

IGU Meerpur हरियाणा/रेवाड़ी | इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (IGU) मीरपुर (RewariNews) में मंगलवार को उस समय भारी बवाल खड़ा हो गया, जब सैकड़ों छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। छात्रों (StudentProtest) का आक्रोश इस कदर था कि, उन्होंने न केवल प्रशासन की ईंट से ईंट बजा दी, बल्कि भारी पुलिस बल के साथ भी उनकी तीखी नोंक-झोंक और धक्का-मुक्की हुई। (RaviMasit) घंटों चले इस ‘प्रद्रशन’ के बाद आखिरकार विश्वविद्यालय प्रशासन को झुकना पड़ा और रजिस्ट्रार को खुद छात्रों के बीच आकर उनकी सभी मांगें माननी पड़ीं। (CorruptionExposed)

StudentUnity: कैंपस बना अखाड़ा: पुलिस और छात्रों में ‘आमने-सामने’ की जंग

यूनिवर्सिटी कैंपस में सुबह से ही तनाव का माहौल था। छात्र नेता रवि मसीत (RaviMasit) और युगल यादव (YugalYadav) के नेतृत्व में छात्रों ने जब अपनी मांगों का बिगुल फूंका, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए घेराबंदी कर दी। लेकिन छात्रों का जोश भारी पड़ा। बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और विद्यार्थियों में जमकर धक्का-मुक्की हुई। माहौल इतना गर्मा गया कि छात्र सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए कुलपति (VC) और रजिस्ट्रार कार्यालय के अंदर जा घुसे और वहां जोरदार नारेबाजी की।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: “गेट और सड़क निर्माण में बड़ा खेल”

इस आंदोलन ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया जब छात्र नेता रवि मसीत ने सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को भ्रष्टाचार के कठघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी के बाहर बन रहे नए गेट और सड़क की गुणवत्ता (Quality) पर सवाल उठाते हुए कहा कि, प्रशासन विकास के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। सड़क और गेट के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। हम छात्रों के हक के पैसे का इस तरह बंदरबांट नहीं होने देंगे। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

मुद्दा: शेल्टर की कमी और छात्रों की बेबसी

छात्रों की सबसे बड़ी मांग यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर बस शेल्टर की सुविधा को लेकर थी। रवि मसीत ने बताया कि लंबे समय से छात्र धूप और बारिश में बिना शेल्टर के बसों का इंतजार करने को मजबूर हैं। प्रशासन ने इस मांग को लगातार नजरअंदाज किया, जिसके बाद छात्रों का सब्र टूट गया। छात्रों ने दो टूक कहा कि जब तक बाहर शेल्टर नहीं बनता, तब तक यूनिवर्सिटी की बसें और रोडवेज बसें कैंपस के अंदर ही आएंगी।

आखिरकार झुकना पड़ा प्रशासन को

छात्रों के उग्र प्रदर्शन और रजिस्ट्रार ऑफिस के घेराव को देखते हुए प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। अंत में वाइस चांसलर के निर्देश पर रजिस्ट्रार को छात्रों के बीच आना पड़ा और उनकी शर्तें माननी पड़ीं।

Leave a Comment

New Update WhatsApp Join WhatsApp