पर्यावरण अपराध नई दिल्ली। विज्ञापन अब पर्यावरण (पर्यावरण अपराध) के लिए बड़ी मुसीबत बन रहे हैं। निजी फर्में और शिक्षण संस्थान छोटे से लेकर बड़े पैमाने पर विज्ञापन या पोस्टर लगाने के लिए कीलें ठोक रहे हैं। News Voice के विश्लेषण में सामने आया कि, कई छोटे-छोटे पेड़ों पर 2-2 इंच तक की कीलें ठोक दी गई हैं, जो पेड़ के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। नियमों के अनुसार, जीवित पेड़ों को इस तरह से नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है, लेकिन इसके बावजूद शहर में सैंकड़ों स्थानों पर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का खंभा बनाया गया है। कील ठोकने से पेड़ों के टिशुज डैमेज हो रहे हैं, जिससे उनके असुरक्षित होने का खतरा बढ़ गया है।
-इन पॉइंट्स पर पेड़ों के सीने में ठोक रखी हैं कीलें (Environmental crime)
- नारनौल रोड: यहां सड़क किनारे लगे पेड़ों पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन बोर्ड लगे हैं।
- गढ़ी बोलनी रोड: इस मार्ग पर भी पेड़ों को विज्ञापन का जरिया बनाया गया है।
- बावल रोड: यहां भी पेड़ों के तनों में गहरी कीलें ठोककर पोस्टर टांगे गए हैं।
- प्रमुख स्थल: सिविल अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे के आसपास भी स्थिति चिंताजनक है।
- लोकल सड़कें: शहर की अंदरूनी सड़कों और कॉलोनियों में भी विज्ञापनों के लिए पेड़ों को छलनी किया गया है।
क्यों जरूरी है पेड़ बचाना, जानिए
पेड़ रेवाड़ी के फेफड़े हैं। उनमें 2 इंच की कीलें ठोकने से कैम्बियम परत (छाल के नीचे का जीवित ऊतक) क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे पानी और पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित होता है। इसके चलते कई प्रभाव पड़ते हैं।
धीमी गति से होने वाला जहर: पेड़ का बढ़ना बंद हो जाता है और अंततः वह सूख जाता है।
संक्रमण: नाखूनों से बने खुले घाव कवक और दीमक के प्रवेश द्वार बन जाते हैं।
संरचनात्मक कमजोरी: कीलों से जड़े पेड़ तूफान के दौरान गिरने की अधिक संभावना रखते हैं, जिससे जानमाल का खतरा होता है।
इसके लिए प्रशासन कैसे काम करे, जानिए
- कठोर दंड: जिन कोचिंग सेंटरों और फर्मों के नाम पोस्टरों पर छपे हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
- अनिवार्य एफआईआर: हरियाणा संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1989 के तहत मामले दर्ज करें।
- हटाने के अभियान: सभी लोहे की कीलों और तख्तों को भौतिक रूप से हटाने के लिए “कील-मुक्त पेड़” अभियान शुरू करें।
- नोडल अधिकारी: नारनौल, बावल और गढ़ी बोलनी जैसी प्रमुख सड़कों की निगरानी के लिए विशिष्ट अधिकारियों की नियुक्ति करें।
स्कूलों में गुरुजी ही नहीं दिखा रहे जागरूकता:::
हैरानी की बात यह है कि, ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी पेड़ों का इस्तेमाल घंटी टांगने के लिए हो रहा है। कीलें ठोककर भारी घंटियां लटका दी गई हैं। जो शिक्षक बच्चों को पर्यावरण का पाठ पढ़ाते हैं, वे खुद इस प्रति जागरूक नहीं दिख रहे।
नगर परिषद को लिखा था: रैंजर
वन विभाग के रेंजर जितेन्द्र कुमार के मुताबिक, वन विभाग की तरफ से नगर परिषद को पिछले महीने लिखा गया था, इस माह फिर लिख देंगे ताकि कार्रवाई की जा सके। सड़कों के आसपास हमें भी कई बार ऐसे कील ठुके पोस्टर मिल जाते हैं, जिन्हें तुरंत हटवाया जाता है। लोगों को पेड़ में कील नहीं ठोकनी चाहिए, क्योंकि पेड़ में भी जीव होता है और कील की वजह से वह कमजोर होकर सूखने लगता है।
अभियान चलाकर ऐसे पेड़ों की सफाई कराएंगे- डीएमसी
नगर परिषद के डीएमसी ब्रह्मप्रकाश के मुताबिक, पेड़ों पर इस तरह कील ठोकना बिल्कुल गलत है, इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे। अधिकारियों से रिपोर्ट लेंगे कि वन विभाग ने पत्र भेजा है या नहीं। अगर नहीं भेजा होगा, तब भी कार्रवाई की जाएगी। शहर में अभियान चलाकर पेड़ों की सफाई कराएंगे। कोचिंग और शिक्षण संस्थानों के लोग पढ़े-लिखे होते हैं, उन्हें खुद समझदारी दिखानी चाहिए। हर इंसान को जागरूक बनकर काम करना होगा।