Rewari News/Haryana Roadways रेवाड़ी । फ्री बस पास धारक 9,365 यात्रियों के लिए सफर करना मुश्किल होता जा रहा है। परिवहन विभाग ने स्टेज कैरेज स्कीम-2016 के तहत सभी प्राइवेट बस ऑपरेटरों को निर्देश दिए थे कि, वे रोडवेज की तर्ज पर पास धारकों को मुफ्त यात्रा सुविधा उपलब्ध कराएं। आदेश के बावजूद ऑपरेटरों ने इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है। Rewari News, Haryana Roadways Free Pass
पिछले छह दिनों में निदेशालय की सख्ती के बाद भी जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया है, और यात्री, विशेषकर छात्राएं, हर दिन अपनी जेब से किराया देने को मजबूर हैं। विभाग के मुताबिक, जिले के लोकल रूटों पर 70 प्रतिशत प्राइवेट बसों का कब्जा है, जिससे यात्रियों के पास इन्हीं बसों में सफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सब्सिडी के अभाव में ये सुविधा देने से ऑपरेटरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे फ्री पास धारक यात्रियों, जिनमें छात्रा, बुजुर्ग समेत अन्य की जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। Private Bus Operators Rewari, Student Bus Pass Issue, RTA Rewari Action
70 प्रतिशत रूटों पर प्राइवेट बसों का कब्जा
जिले के प्रमुख चार रूटों पर कुल 233 फेरे (ट्रिप) हैं। इनमें से मात्र 68 फेरे (30%) रोडवेज के हैं, जबकि 165 फेरे (70%) प्राइवेट बसों के हैं। महेंद्रगढ़ रूट पर कुल 107 में से 71 प्राइवेट और 36 रोडवेज बसें हैं। पटौदी रूट पर 57 में से 28 प्राइवेट और 29 रोडवेज की बसें हैं। कोसली रूट पर कुल 24 में से 21 प्राइवेट और केवल 3 रोडवेज बसें हैं। अटेली रूट पर भी स्थिति ऐसी ही है, जहां 45 में से ज्यादातर फेरे प्राइवेट बसों के हैं। लोकल रूटों पर प्राइवेट ऑपरेटरों की अधिकता होने के कारण ही पास धारकों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। Rewari College Students, News Voice India
शिक्षा से ज्यादा यात्रा का खर्च
सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों पर शिक्षा के खर्च से ज्यादा यात्रा का खर्च भारी पड़ रहा है। एक छात्रा की कॉलेज फीस लगभग 3,850 रुपये सालाना है। वहीं, प्रतिदिन 35 से 40 रुपये किराया देने के कारण सालाना खर्च 10 हजार से 13 हजार रुपये तक पहुंच रहा है। यानी फीस के मुकाबले यात्रा का खर्च तीन गुना अधिक है। कुछ छात्रों का यह खर्च 20 हजार से 28 हजार रुपये सालाना तक पहुंच रहा है। आर्थिक बोझ बढ़ने के कारण गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई छूटने का खतरा बना हुआ है। ऑपरेटरों द्वारा किराया वसूले जाने से विद्यार्थियों का सालाना बजट बिगड़ गया है।