Women Reservation News नई दिल्ली । संसद के गलियारों में आज हलचल तेज है। मुद्दा है, महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का। वैसे तो यह सुनने में बहुत अच्छा लगता है कि, अब देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन इसके पीछे ‘परिसीमन’ का एक ऐसा पेंच फंसा है, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। आज संसद में इसी मुद्दे पर वोटिंग होनी है और सरकार के लिए इसे पास कराना एक बड़ी अग्निपरीक्षा जैसा है।
आखिर क्या है विवाद की मुख्य जड़?
सरकार तीन नए बिल लेकर आई है, जिनका मकसद महिलाओं को आरक्षण देना और सीटों का नए सिरे से बंटवारा करना है। विपक्ष का कहना है कि, वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।
अब सवाल उठता है कि, यह परिसीमन क्या है? आसान भाषा में कहें तो आबादी के हिसाब से लोकसभा की सीटों की संख्या को फिर से तय करना। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे पॉलिटिकल डिमॉनेटाइजेशन यानी ‘राजनीतिक नोटबंदी’ कहा है। उनका मानना है कि, अगर सीटों का बंटवारा आबादी के आधार पर हुआ, तो उत्तर भारत के राज्यों (जैसे यूपी, बिहार) में सीटें बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडु) की सीटें कम रह जाएंगी, क्योंकि उन्होंने अपनी आबादी को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है।
संसद में आज क्या होने वाला है?
सरकार ने इस काम के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है। कुल तीन बिलों पर वोटिंग होनी है।
- संविधान संशोधन विधेयक: इसके जरिए महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा।
- परिसीमन विधेयक 2026: इसके जरिए यह तय होगा कि भविष्य में सीटें कैसे बढ़ेंगी।
- केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा बिल: जो दिल्ली और जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों में नियम तय करेगा।
इन बिलों को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। चर्चा इतनी लंबी चली कि गुरुवार रात को भी सदन डेढ़ बजे तक चलता रहा।
प्रधानमंत्री की चेतावनी और विपक्ष की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में साफ कहा कि, यह समय राजनीति करने का नहीं है। उन्होंने सभी पार्टियों से अपील की है कि, वे इस बिल का समर्थन करें। पीएम ने उन नेताओं को आगाह भी किया, कि जो इसका विरोध करेंगे, जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि, परिसीमन से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा, बल्कि सबका प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।