Vande Bharat Train की ‘प्रीमियम’ थाली में कीड़े: करोड़ों का किराया, लाखों का जुर्माना, पर यात्रियों की सेहत का क्या?

Vande Bharat Train नई दिल्ली । भारत की शान कही जाने वाली और सेमी-हाई स्पीड रफ्तार से दौड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर चर्चा में है। लेकिन इस बार चर्चा इसकी रफ्तार या सुविधाओं की नहीं, बल्कि उस ‘जहर’ की है, जो यात्रियों को प्रीमियम थाली के नाम पर परोसा जा रहा है। अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली इस ट्रेन में यात्रियों के खाने में कीड़े मिलने की घटना ने रेलवे के स्वच्छता और सुरक्षा के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। (Vande Bharat Food Quality Case)

सुविधाओं के नाम पर ‘धोखा’?

वंदे भारत कोई साधारण ट्रेन नहीं है। इसका किराया सामान्य ट्रेनों से कहीं ज्यादा है। यात्री भारी-भरकम पैसे सिर्फ इसलिए देता है कि, उसे विश्वस्तरीय सुविधाएं, सुरक्षा और शुद्ध खाना मिलेगा। लेकिन जब थाली में रेंगते हुए कीड़े नजर आते हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि यात्रियों के भरोसे का कत्ल है। (IRCTC Fine on Food Vendor) (Insects in Vande Bharat Meal) (Ahmedabad Mumbai Vande Bharat News)

आदित्य डिडवानिया नाम के एक यात्री ने जब सोशल मीडिया पर खाने की फोटो साझा की, तो हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह है कि, यह किसी एक व्यक्ति की शिकायत नहीं थी। एक ही कोच में कम से कम दो ऐसी घटनाएं सामने आईं। सोचिए, जिस कोच में यात्री बड़े चाव से नाश्ता या खाना कर रहे थे, वहां जब यह पता चला होगा कि खाने में कीड़े हैं, तो उन पर क्या गुजरी होगी। कई यात्रियों ने डर के मारे खाना ही छोड़ दिया।

जुर्माने से क्या व्यवस्था सुधर जाएगी?

घटना के बाद रेलवे और IRCTC ने अपनी पुरानी रवायत दोहराई। कार्रवाई के नाम पर फूड वेंडर (M/S ब्रंदावन फूड प्रोडक्ट्स – RK ग्रुप) पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया गया और कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का नोटिस जारी कर दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या 10 लाख का जुर्माना उस खतरे की भरपाई कर सकता है, जो यात्रियों की सेहत को हो सकता था? (Railway Catering Negligence)

यह पहली बार नहीं है, जब वंदे भारत या किसी अन्य प्रीमियम ट्रेन में खराब खाने की शिकायत आई है। रेलवे अक्सर जुर्माना लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां नहीं बदलतीं। 10 लाख रुपये जैसी राशि इन बड़े वेंडर्स के लिए शायद बहुत छोटी है, जो हर दिन हजारों थालियां सप्लाई करते हैं। असली सवाल तो यह है कि बेस किचन में सफाई की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है?

सिस्टम पर सीधे सवाल…

रेलवे कहता है कि, उसने डीप क्लीनिंग और पेस्ट कंट्रोल कराया है। मगर यह काम तो रूटीन का हिस्सा होना चाहिए था। क्या रेलवे को किसी यात्री के बीमार होने या सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने का इंतजार रहता है? (Indian Railways Food Safety) (Vande Bharat Train Complaints)

सुपरविजन की कमी: वेंडर को ठेका देने के बाद क्या रेलवे के अधिकारी औचक निरीक्षण नहीं करते?

बेस किचन की बदहाली: खाना जिस जगह बनता है, वहां की गंदगी और लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि कीड़े सीधे थाली तक पहुंच रहे हैं।

Leave a Comment

New Update WhatsApp Join WhatsApp