Crime News Rewari रेवाड़ी । कहते हैं कि, अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ उसकी गर्दन तक पहुंच ही जाते हैं। रेवाड़ी जीआरपी ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसकी कहानी सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यह कहानी है, एक ऐसे शख्स की जो सब्जी बेचता था, लेकिन चंद रुपयों के लालच ने उसे एक शातिर अपराधी बना दिया। आज वह और उसके साथी सलाखों के पीछे हैं और उनके पास से बरामद हुआ है 30 लाख रुपये का कीमती सामान। (Train Travel Safety)
एक गलत फैसले ने बदली जिंदगी की दिशा
इस गिरोह का मास्टरमाइंड प्रिंसपाल कभी ईमानदारी से सब्जी की रेहड़ी लगाता था। उसकी अपराधी बनने की शुरुआत तब हुई जब उसने महज 3,000 रुपये में चोरी का एक मोबाइल खरीदा और उसे 7,000 रुपये में बेच दिया। बिना मेहनत के मिले उस 4,000 रुपये के मुनाफे ने उसे शॉर्टकट के रास्ते पर धकेल दिया। धीरे-धीरे वह मोबाइल चोरी से गहनों की बड़ी चोरियों तक पहुंच गया। जेल की हवा खाने के बाद भी उसने रास्ता नहीं बदला, बल्कि वहाँ से लौटकर और भी शातिर गैंग तैयार कर लिया। (Indian Railways Theft)
वेल्डिंग की जगह काटने लगे यात्रियों के अरमान
गिरोह का दूसरा सदस्य रमेश त्यागी पेशे से वेल्डर था। दिल्ली से अंबाला की एक रेल यात्रा के दौरान उसकी मुलाकात प्रिंसपाल से हुई। बस, यहीं से दो शातिर दिमाग मिल गए। जो हाथ कभी लोहे को जोड़ने का काम करते थे, वे अब ट्रेनों में यात्रियों के बैग और कीमती सामान के ताले तोड़ने लगे। इन लोगों ने दिल्ली-बीकानेर संपर्क क्रांति जैसी बड़ी ट्रेनों को अपना निशाना बनाया, जहां यात्री लंबी दूरी के कारण गहरी नींद में होते थे।
डॉक्टर परिवार का सफेदपोश मददगार
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू है चोरी का माल खरीदने वाला सुनार विश्वास गौतम। विश्वास एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखता है; उसकी बहन पीजी कर रही है और छोटा भाई एमबीबीएस का छात्र है। घर में डॉक्टरों की फौज होने के बावजूद, विश्वास ने चंद रुपयों के लालच में इन चोरों का साथ दिया। वह सस्ते में चोरी के गहने खरीदता था, जिससे चोरों का हौसला और बढ़ गया। पुलिस ने उसे भी दबोच लिया है।