Rewari News Today नई दिल्ली । जब सरकारी महकमे अपनी ज़िम्मेदारी की गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने लगें, तो समझ लीजिए कि आम जनता की किस्मत में सिर्फ अंधेरा और परेशानियां ही लिखी हैं। रेवाड़ी-बेरली रोड (वाया चांदावास) पर पिछले काफी समय से पसरा सन्नाटा और बुझी हुई स्ट्रीट लाइटें इसी प्रशासनिक विफलता की जीती-जागती मिसाल हैं। हैरानी की बात यह है कि जहां डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के दावे किए जा रहे हैं, वहीं एक प्रमुख सड़क को रोशन करने के लिए प्रशासन के पास इच्छाशक्ति का भारी अभाव दिख रहा है। (Rewari News Today)
विभागों की खींचतान या जनता से खिलवाड़?
इस मामले में सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू विभागों की आपसी खींचतान है। स्थानीय निवासी संजीव चांदावास और अन्य शिकायतकर्ताओं का कहना है कि, जब भी इस समस्या को लेकर गुहार लगाई जाती है, तो विभाग ‘तर्क’ (या कहें कुतर्क) देता है कि यह कार्य उनकी इलेक्ट्रिकल शाखा का है। अब सवाल यह उठता है कि, क्या इलेक्ट्रिकल शाखा किसी दूसरे देश का हिस्सा है? जब यह शाखा भी लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत ही आती है, तो फिर यह ‘आपसी समन्वय’ का अभाव क्यों? क्या अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा उन राहगीरों को भुगतना होगा जो टैक्स भरते हैं?

हादसों को दावत देता ब्लैक स्पॉट
रेवाड़ी-बेरली रोड एक व्यस्त मार्ग है। रात के समय स्ट्रीट लाइटें बंद होने की वजह से यह पूरी सड़क एक डेथ ट्रैप (मौत का जाल) बन चुकी है। (Rewari News Today)
सुरक्षा का खतरा: अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ने का डर बना रहता है।
सड़क दुर्घटनाएं: बिना रोशनी के मोड़ और गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन वाहन चालक असंतुलित होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं।