Anglo Zanzibar War नई दिल्ली । कल्पना कीजिए कि, दो देशों के बीच युद्ध का औपचारिक ऐलान होता है, तोपें गरजती हैं, बारूद का भयंकर धुआं उठता है और जब तक कोई इंसान बैठकर चाय की चुस्की खत्म करे, तब तक एक देश घुटने टेक देता है! सुनने में यह किसी फ़िल्मी कहानी या किसी ड्रामे जैसा लगता है, लेकिन दुनिया के सैन्य इतिहास के पन्नों में यह खौफनाक सच दर्ज है।
27 अगस्त 1896 की सुबह अफ्रीका के पूर्वी तट पर स्थित ज़ांज़ीबार (Zanzibar) द्वीप पर कुछ ऐसा ही हुआ था। ब्रिटिश साम्राज्य की विशाल नौसेना और ज़ांज़ीबार के नए सुल्तान के बीच लड़ा गया ‘एंग्लो-ज़ांज़ीबार युद्ध’ (Anglo-Zanzibar War) इतिहास की सबसे छोटी जंग माना जाता है। यह मुकाबला महज 38 से 40 मिनट के भीतर ही हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गया था।
तख्तापलट और ब्रिटिश अल्टीमेटम का सस्पेंस
इस ऐतिहासिक टकराव की शुरुआत 25 अगस्त 1896 को हुई, जब ज़ांज़ीबार के प्रो-ब्रिटिश सुल्तान ‘हमद बिन थुवैनी’ की अचानक संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। सुल्तान की सांसें थमते ही उनके भतीजे राजकुमार खालिद बिन बरगश ने मौके का फायदा उठाया। उसने अंग्रेजों की अनुमति के बिना खुद को नया सुल्तान घोषित कर दिया और शाही महल पर कब्जा कर लिया।
1890 की ईस्ट अफ्रीका संधि के तहत नया सुल्तान चुनने की अंतिम मंजूरी ब्रिटिश कांसुल के पास थी। ब्रिटेन चाहता था कि उनका वफादार ‘हमुद बिन मुहम्मद’ गद्दी संभाले। अंग्रेजों ने खालिद को तुरंत महल खाली करने की चेतावनी दी और 27 अगस्त की सुबह 9:00 बजे का कड़ा अल्टीमेटम दिया।
खालिद ने इसे हल्के में लिया। उसे लगा कि, अंग्रेज शायद इतनी जल्दी सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे। उसने 3,000 सैनिकों, महल के गार्ड्स और एक पुरानी नौका (गनबोट) को सुरक्षा में तैनात कर दिया।
सुबह 9:02 बजे: आसमान से बरसा बारूद
घड़ी की सुइयों ने जैसे ही सुबह के 9:00 बजाए, अल्टीमेटम की मियाद खत्म हो गई। सुल्तान ने सरेंडर करने से साफ इंकार कर दिया। इसके ठीक दो मिनट बाद सुबह 9:02 बजे ब्रिटिश नौसेना के 5 आधुनिक युद्धपोतों (Cruisers) ने सुल्तान के महल पर ताबड़तोड़ बमबारी शुरू कर दी।
- ताश के पत्तों की तरह ढहा लकड़ी का महल: ब्रिटिश तोपों के भारी-भरकम गोलों ने कुछ ही मिनटों में सुल्तान के विशाल लकड़ी के महल को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया और पूरे परिसर में भयंकर आग लग गई।
- समुद्र में डूबी एकमात्र गनबोट: ज़ांज़ीबार की एकमात्र पुरानी शाही नौका ‘HHS सेन्ट विंसेंट’ को अंग्रेजों ने चंद सेकेंडों में डुबो दिया।
- तकनीकी ताकत का खौफनाक प्रदर्शन: ज़ांज़ीबारी सैनिकों के पास पुरानी बंदूकें थीं, जबकि ब्रिटिश सेना ऑटोमैटिक मशीन गन और भारी तोपों से लैस थी।
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