Shahed-101 Electric Drone: तेहरान | आज के आधुनिक युद्धक्षेत्र में तकनीक केवल मिसाइलों और लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रह गई है। युद्ध का नया चेहरा अब ड्रोन (UAVs) बन चुके हैं। इसी कड़ी में ईरान का Shahed-101 का नया इलेक्ट्रिक वर्जन रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। इसे साइलेंट किलर या अदृश्य मौत के नाम से पुकारा जा रहा है। यह आर्टिकल ईरान के इस ड्रोन की तकनीकी बारीकियों, इसके रडार से बचने की क्षमता और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करेगा। न्यूज वॉइस के रिपोर्टर को खुद ईरान के कई विशेषज्ञों ने बताया है।
आखिर क्या है Shahed-101 इलेक्ट्रिक ड्रोन? (Shahed-101 Electric Drone)
Shahed-101 ईरान की प्रसिद्ध Shahed ड्रोन सीरीज का सबसे आधुनिक और घातक संस्करण है। इसके पूर्ववर्ती मॉडल जैसे Shahed-136, जो यूक्रेन युद्ध में अपनी मारक क्षमता दिखा चुके हैं, काफी शोर करते थे। लेकिन Shahed-101 में ईरान ने क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इसमें इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम (Electric Propulsion System) का इस्तेमाल किया है। यह एक लोइटरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) है, जिसे आम भाषा में सुसाइड ड्रोन या कामिकेज़ ड्रोन कहा जाता है। यह ड्रोन अपने लक्ष्य के ऊपर मंडराने और सटीक मौका मिलते ही उससे टकराकर धमाका करने के लिए डिजाइन किया गया है।
साइलेंट किलर क्यों? अदृश्य बनाती है तकनीक
इस ड्रोन को साइलेंट कहने के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हैं। परंपरागत ड्रोनों में इंटरनल कंबशन इंजन (पेट्रोल इंजन) होता है, जो उड़ते समय तेज आवाज करता है। Shahed-101 ने इस शोर को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
इलेक्ट्रिक मोटर का जादू: Shahed-101 में लिथियम-आयन बैटरी द्वारा संचालित हाई-टॉर्क इलेक्ट्रिक मोटर लगी है। यह मोटर उड़ते समय किसी भी प्रकार की आवाज पैदा नहीं करती। जब यह ड्रोन रात के अंधेरे में उड़ता है, तो जमीन पर खड़े दुश्मन को इसके ऊपर होने का पता तब तक नहीं चलता जब तक कि विस्फोट न हो जाए।
इन्फ्रारेड और थर्मल सिग्नेचर में कमी: रडार के अलावा, कई एयर डिफेंस सिस्टम हीट सेंसर के जरिए ड्रोन को ट्रैक करते हैं। पेट्रोल इंजन वाले ड्रोन काफी गर्मी (Heat) पैदा करते हैं। चूंकि Shahed-101 इलेक्ट्रिक है, इसलिए यह बहुत कम गर्मी छोड़ता है। इसके चलते इन्फ्रारेड गाइडेड मिसाइलों के लिए इसे लॉक करना लगभग असंभव हो जाता है।
रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) का नियंत्रण: ईरान ने इस ड्रोन के निर्माण में कार्बन फाइबर और विशेष कंपोजिट सामग्रियों का उपयोग किया है। ये सामग्रियां रडार की तरंगों को सोख लेती हैं या उन्हें इस तरह बिखेर देती हैं कि रडार स्क्रीन पर यह एक छोटे पक्षी जैसा दिखाई देता है।
कार्यप्रणाली: कैसे काम करता है यह ड्रोन?
Shahed-101 का ऑपरेशन बेहद सरल लेकिन घातक है। इसकी कार्यप्रणाली को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म: इसे एक छोटी पिकअप कार, ट्रक या यहां तक कि एक छोटे स्टैंड से लॉन्च किया जा सकता है। इसके लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं होती।
नेविगेशन सिस्टम: यह मल्टी-मोड नेविगेशन का उपयोग करता है। इसमें रूस के GLONASS और अमेरिकी GPS के साथ-साथ एक इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) भी होता है। यदि दुश्मन ने GPS जैम कर दिया, तो INS इसे अपने पूर्व-निर्धारित लक्ष्य तक ले जाने में मदद करता है।
ऑप्टिकल सेंसर: इसके अगले हिस्से में एक छोटा कैमरा होता है जो ऑपरेटर को लाइव फीड भेजता है। ऑपरेटर इसे दूर बैठकर रिमोट से कंट्रोल कर सकता है और अंतिम क्षणों में लक्ष्य को बदल भी सकता है।
वारहेड (Explosive): इसमें लगभग 8 से 10 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक (High-Explosives) लगा होता है, जो किसी भी टैंक, रडार स्टेशन या सैन्य चौकी को तबाह करने के लिए काफी है।