India Bangladesh Diesel Pipeline: नई दिल्ली युद्ध के बीच भारत ने बांग्लादेश को भेजा डीजल, पाइपलाइन वाली इस डील की पूरी कहानीदुनिया में इस समय युद्ध के हालात बने हुए हैं। खाड़ी देशों में चल रही लड़ाई की वजह से हर तरफ तेल का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे मुश्किल समय में भारत ने अपने पड़ोसी देश हिंदुस्तान की दोस्ती का फर्ज निभाते हुए बांग्लादेश की बड़ी मदद की है। इंडिया ने पाइपलाइन के जरिए 5 हजार टन डीजल की पहली बड़ी खेप बांग्लादेश भेज दी है। यह मदद भारत और बांग्लादेश के बीच हुए उस खास समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत भारत हर साल पाइपलाइन के जरिए 1 लाख 80 हजार टन डीजल सप्लाई करेगा। यह सप्लाई ऐसे समय में शुरू हुई है जब पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है।
India Bangladesh Diesel Pipeline
बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसी) के चेयरमैन मोहम्मद रेजानुर रहमान ने खुद इस बात की खुद जानकारी दी है, कि भारत से डीजल की खेप उनके पास पहुंच गई है। उन्होंने न्यूज एजेंसी को बताया कि हमारा भारत के साथ एक बहुत ही अहम समझौता है। उस समझौते के मुताबिक, भारत पाइपलाइन के माध्यम से हर साल बांग्लादेश को 1 लाख 80 हजार टन डीजल की आपूर्ति करेगा। उन्होंने आगे बताया कि अभी जो 5 हजार टन डीजल पहुंचा है, वो इसी वार्षिक समझौते का एक हिस्सा है और आने वाले समय में यह सिलसिला जारी रहेगा।
कैसे और कब हुई थी यह ऐतिहासिक डील
इस पूरी योजना की नींव आज से करीब आठ साल पहले रखी गई थी। साल 2018 में भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ा समझौता हुआ था। उस समय दोनों देशों ने मिलकर सिलीगुड़ी (भारत) से पारबतीपुर (बांग्लादेश) के बीच एक लंबी तेल पाइपलाइन बिछाने का फैसला किया था। इस पाइपलाइन की कुल लंबाई लगभग 129.5 किलोमीटर है। यह कोई साधारण पाइपलाइन नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की एक मजबूत कड़ी है। पीटीआई की भाषा के मुताबिक, इस समझौते पर हस्ताक्षर तब हुए थे, जब भारत के तत्कालीन विदेश सचिव विजय गोखले और बांग्लादेश के विदेश सचिव मोहम्मद शाहिदुल हक ने मुलाकात की थी। उस समय सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि तीस्ता जल साझेदारी और रोहिंग्या शरणार्थी संकट जैसे बड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। इस डील का असली मकसद यह था कि, बांग्लादेश को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे दूर-दराज के देशों पर निर्भर न रहना पड़े और भारत के जरिए उसे सस्ता, सुरक्षित और साफ ईंधन मिल सके। तब से लेकर अब तक दोनों देश इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए लगातार काम कर रहे थे और अब जाकर इसका बड़ा फायदा बांग्लादेश की जनता को मिलना शुरू हुआ है।
2018 से अब तक के महत्वपूर्ण अपडेट
2018: सिलीगुड़ी से पारबतीपुर के बीच पाइपलाइन बनाने के लिए मुख्य समझौते पर दस्तखत हुए। इसकी योजना बनाई गई और नक्शा तैयार किया गया।
2019: जमीन अधिग्रहण और पाइपलाइन बिछाने के लिए तकनीकी सर्वे का काम पूरा किया गया। दोनों देशों की टीमों ने मिलकर सीमाओं पर सुरक्षा और तकनीकी तालमेल बिठाया।
2020-2022: यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में थी। लॉकडाउन और पाबंदियों के बावजूद, भारत और बांग्लादेश ने इस प्रोजेक्ट के काम को रुकने नहीं दिया। भारत ने इस प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक और तकनीकी मदद जारी रखी।
2023: मार्च के महीने में एक ऐतिहासिक पल आया जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन का आधिकारिक उद्घाटन किया।
2024: पाइपलाइन की टेस्टिंग की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि तेल की सप्लाई में कोई रिसाव या तकनीकी दिक्कत न आए।
2025-2026: अब युद्ध के भारी संकट के बीच, जब दुनिया तेल के लिए तरस रही है, 5 हजार टन डीजल की पहली खेप सफलतापूर्वक बांग्लादेश पहुंच गई है। यह दिखाता है कि यह प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से चालू हो गया है।