Kalibanga Civilization/Rajasthan History हनुमानगढ़ | सिंधु घाटी सभ्यता के कई रहस्य ऐसे हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को हैरान कर देते हैं। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी (प्राचीन सरस्वती नदी) के किनारे बसी कालीबंगा सभ्यता एक ऐसा ही ऐतिहासिक अजूबा है। पंजाबी भाषा में ‘बंगा’ का मतलब चूड़ी होता है और काले रंग की चूड़ियों के अवशेष मिलने की वजह से ही इस जगह का नाम कालीबंगा पड़ा। Kalibanga Civilization, Indus Valley History, Rajasthan History, Hanumangarh History, News Voice India, Rajasthan History
इतिहासकारों के अनुसार, कार्बन डेटिंग पद्धति के अनुसार 2350 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक फले-फूले इस नगर को प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा ने विशाल सिंधु घाटी साम्राज्य की तीसरी राजधानी कहा है। पुरातात्विक दृष्टि से इस महान नगर की सबसे पहली पहचान एलपी टेसीटोरी ने की थी। इसके बाद सन् 1952 में अमलानंद घोष ने इसकी खोज की और फिर 1961 से 1969 के बीच बीबी लाल और बीके थापर के निर्देशन में यहां 5 अलग-अलग स्तरों पर गहरी खुदाई की गई।पहले दो स्तर प्राक्-हड़प्पा काल के थे और बाद के तीन स्तर पूर्ण हड़प्पा कालीन सभ्यता के निकले। Rajasthan History
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दुनिया का पहला भूकंप जिसने एक ही झटके में मिटा दिया हंसता-खेलता शहर
कालीबंगा सभ्यता से जुड़ी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, इस समृद्ध और खुशहाल प्राचीन नगर का अंत किसी बाहरी राजा के आक्रमण या किसी बड़ी बाढ़ से नहीं हुआ था। उत्खनन के दौरान जब वैज्ञानिकों ने यहां के प्राक्-हड़प्पा कालीन मकानों और दीवारों की गहराई से जांच की तो उनमें बड़ी-बड़ी दरारें और टूटे हुए हिस्से दिखाई दिए। यह दरारें इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि, लगभग 2600 ईसा पूर्व यहां दुनिया का सबसे पहला प्रलेखित और भयंकर विनाशकारी भूकंप आया था। इस एक अकेले जलजले ने पूरे नगर की मजबूत इमारतों को एक ही पल में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया और एक पूरी फलती-फूलती सभ्यता धरती के भीतर समाकर इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दफन हो गई।
Kalibanga Civilization-एक बच्चे की खोपड़ी ने दुनिया को चौंकाया…
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हम आज जिस न्यूरोसर्जन या ब्रेन सर्जरी पर गर्व करते हैं, उसकी शुरुआत कालीबंगा के लोगों ने हजारों साल पहले ही कर ली थी। खुदाई के दौरान यहां से एक छोटे बच्चे की खोपड़ी मिली है, जिसमें बेहद सफाई से किए गए 6 छिद्र यानी छेद मौजूद हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि, यह बच्चा संभवतः हाइड्रोसिफ़लस नाम की बीमारी से पीड़ित था। मस्तिष्क में पानी भर जाने या सिरदर्द की इस गंभीर बीमारी का इलाज करने के लिए उस दौर के वैद्यों ने खोपड़ी का ऑपरेशन यानी शल्य चिकित्सा की थी। यह पूरी दुनिया के इतिहास में मानव मस्तिष्क की सर्जरी का सबसे पहला और सबसे प्राचीनतम उदाहरण माना जाता है।
दुनिया में सबसे पहली खेती और एक साथ दो-दो फसलें उगाने की गजब तकनीक
कृषि के क्षेत्र में कालीबंगा के निवासियों का दिमाग अपने समय से बहुत आगे था। पूरी दुनिया में सबसे पहले जुते हुए खेत का स्पष्ट प्रमाण इसी माटी से प्राप्त हुआ है। यहां के किसान खेती करने के लिए आड़ी-तिरछी रेखाओं यानी ग्रिड पैटर्न का इस्तेमाल करते थे। इस खास तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह था कि, वे खेत की एक ही जमीन पर एक ही समय में दो अलग-अलग फसलें सफलतापूर्वक उगा लेते थे। उत्खनन में मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि, यहां एक साथ चना और सरसों की खेती की जाती थी। इसके अलावा यहां सूती कपड़ों के अवशेष और बड़े पैमाने पर कपास की खेती के पक्के साक्ष्य भी मिले हैं, जो उस दौर के कृषि ज्ञान को दर्शाते हैं।
लकड़ी की नाली और अलंकृत ईंटें: बिना ईंट-पत्थर के भी सबसे अनोखी जल निकासी
सिंधु घाटी की बाकी सभी समकालीन सभ्यताओं जैसे मोहनजोदड़ो या हड़प्पा में गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की ईंटों की नालियां बनाई जाती थीं। लेकिन कालीबंगा के लोगों ने अपनी एक बिल्कुल अलग और अनोखी तकनीक विकसित की थी। यहां घरों का गंदा पानी बाहर निकालने के लिए लकड़ी को बीच में से खोखला करके बनाई गई विशेष नालियों का इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा यहां के मकानों के फर्श को सुंदर बनाने के लिए सजावटी यानी अलंकृत ईंटों का प्रयोग किया जाता था। सड़कों का निर्माण ऑक्सफोर्ड पद्धति यानी ग्रिड पैटर्न पर किया गया था, जहां सभी रास्ते एक-दूसरे को बिल्कुल 90 डिग्री के समकोण पर काटते थे।
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कच्ची ईंटों के मकान और दोहरे परकोटे वाली गरीब बस्ती का पूरा सच
कालीबंगा नगर दो अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था, जिसमें एक पश्चिमी दुर्ग का टीला था और दूसरा पूर्वी नगर का टीला था। सुरक्षा के लिहाज से इन दोनों भागों के चारों तरफ अलग-अलग सुरक्षा दीवारें यानी दोहरा परकोटा बनाया गया था। लेकिन इस नगर की सबसे खास बात यह थी कि यहां के अधिकांश मकान पक्की ईंटों के बजाय धूप में सुखाई गई कच्ची ईंटों से बनाए गए थे। इसी कारण से इतिहासकारों ने इसे पूरी सिंधु घाटी सभ्यता की दीन-हीन या गरीब बस्ती का दर्जा दिया है। इसके बावजूद नगर नियोजन और सुरक्षा व्यवस्था के मामले में यह शहर किसी भी मायने में कमतर नहीं था। Kalibanga Civilization
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Rajasthan History-मेसोपोटामिया से व्यापार और 7 अग्निकुंडों में छिपा धार्मिक रहस्य
कालीबंगा केवल एक कृषि आधारित नगर नहीं था, बल्कि इसका दायरा विदेशों तक फैला हुआ था। खुदाई में यहां से बेलनाकार मुहरें मिली हैं, जो सीधी तौर पर प्राचीन मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) की सभ्यता के साथ इसके व्यापारिक संबंधों को साबित करती हैं। एक मिट्टी की मुहर पर चीते यानी व्याघ्र का चित्र भी उकेरा गया है। धार्मिक रीति-रिवाजों की बात करें तो यहां एक चबूतरे पर 7 आयताकार अग्निकुंड या हवन कुंड मिले हैं। इन हवन कुंडों के अंदर से राख और पशुओं की हड्डियां प्राप्त हुई हैं, जो यह संकेत देती हैं कि उस काल में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पशु बलि देने की परंपरा मौजूद थी। यातायात के लिए यहां खिलौना बैलगाड़ी के पहिए और ऊंटों की हड्डियां भी बड़ी मात्रा में मिली हैं।
अंतिम संस्कार के 3 तरीके और अंत को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग दावे
यहां के लोग अपने परिजनों की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए तीन अलग-अलग तरीकों का पालन करते थे। जिनमें शव को पूरी तरह दफनाना (पूर्ण समाधिकरण), शरीर के कुछ हिस्सों को दफनाना (आंशिक समाधिकरण) और शव को जलाना (दाह संस्कार) शामिल था। यहां से एक अंडाकार कब्र भी मिली है, जिसे चिरायु कब्र कहा जाता है। नगर के पतन को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग राय है। प्रसिद्ध इतिहासकार केयूआर कैनेडी का मानना है कि, इस नगर के अंत का कारण कोई भयंकर संक्रामक महामारी थी। वहीं कई अन्य विद्वान मानते हैं कि, भयंकर भूकंप के झटकों और सरस्वती नदी के सूख जाने की वजह से यह विशाल सभ्यता हमेशा के लिए खत्म हो गई। Kalibanga Civilization, Indus Valley History, Rajasthan History, Hanumangarh History, News Voice India, Rajasthan History
कालीबंगा: परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 20 सवाल…
1. कालीबंगा सभ्यता राजस्थान के किस जिले में स्थित है?
-कालीबंगा सभ्यता राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है।
2. कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
-कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ काले रंग की चूड़ियां होता है, जहां पंजाबी भाषा के शब्द बंगा का अर्थ चूड़ी होता है।
3. कालीबंगा सभ्यता किस नदी के किनारे विकसित हुई थी?
-यह सभ्यता प्राचीन सरस्वती नदी यानी वर्तमान घग्घर नदी के बाएं तट पर फली-फूली थी।
4. कालीबंगा पुरातात्विक स्थल की सबसे पहले पहचान किसने की थी?
-इस प्राचीन स्थल की पुरातात्विक महत्ता को सबसे पहले इतालवी विद्वान एलपी टेसीटोरी ने रेखांकित किया था।
5. कालीबंगा सभ्यता की खोज सर्वप्रथम किसने और किस वर्ष की थी?
-कालीबंगा की सर्वप्रथम खोज अमलानंद घोष ने वर्ष 1952 में की थी।
6. कालीबंगा स्थल का विस्तृत उत्खनन कार्य किनके निर्देशन में हुआ था?
-वर्ष 1961 से 1969 के बीच बीबी लाल (ब्रजबासी लाल) और बीके थापर (बालकृष्ण थापर) के निर्देशन में यहां व्यापक खुदाई हुई थी।
7. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को किसकी संज्ञा दी है?
-डॉ दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को सिंधु घाटी साम्राज्य की तीसरी राजधानी कहा है।
8. विश्व में सर्वप्रथम जुते हुए खेत के साक्ष्य कहां से प्राप्त हुए हैं?
-संसार में सबसे पहले जुते हुए खेत के साक्ष्य कालीबंगा से ही मिले हैं, जहां एक साथ दो फसलें उगाने का पैटर्न मिलता है।
9. कालीबंगा में एक साथ कौन सी दो फसलें उगाए जाने के प्रमाण मिले हैं?
यहां ग्रिड पैटर्न पर एक साथ चना और सरसों की खेती किए जाने के प्राचीन साक्ष्य मिले हैं।
10. पूरी दुनिया में प्राचीनतम भूकंप के पहले स्पष्ट साक्ष्य कहां से मिले हैं?
-प्राक्-हड़प्पा कालीन कालीबंगा के मकानों और दीवारों में पड़ी दरारें विश्व के सबसे प्राचीनतम भूकंप का पहला प्रमाण हैं।
11. मानव मस्तिष्क शल्य चिकित्सा यानी ब्रेन सर्जरी के पहले साक्ष्य कहां से मिले हैं?
-कालीबंगा से एक बालक की खोपड़ी मिली है, जिसमें 6 छिद्र बने हैं, जो प्राचीनतम शल्य चिकित्सा का प्रमाण माना जाता है।
12. कालीबंगा में घरों का गंदा पानी बाहर निकालने के लिए किस विशेष प्रकार की नाली का प्रयोग किया गया था?
-सिंधु सभ्यता के अन्य स्थलों से अलग कालीबंगा में लकड़ी की खोखली नालियों का प्रयोग किया गया था।
13. किस सभ्यता स्थल को सिंधु घाटी साम्राज्य की दीन-हीन या गरीब बस्ती कहा जाता है?
-कच्ची ईंटों के बने मकानों के उपयोग के कारण कालीबंगा को दीन-हीन या गरीब बस्ती कहा जाता है।
14. अलंकृत या सजावटी ईंटों के साक्ष्य किस सभ्यता स्थल से प्राप्त हुए हैं?
-फर्श के निर्माण में सजावटी और अलंकृत ईंटों का प्रयोग केवल कालीबंगा में ही देखने को मिलता है।
15. कालीबंगा से कुल कितने आयताकार अग्निकुंड या हवन कुंड मिले हैं?
-यहां एक चबूतरे पर कुल 7 आयताकार अग्नि वेदिकाएं यानी हवन कुंड प्राप्त हुए हैं।
16. मेसोपोटामिया की सभ्यता के साथ व्यापारिक संबंधों को दर्शाने वाली बेलनाकार मुहरें कहां से मिली हैं?
-प्राचीन मेसोपोटामिया से व्यापारिक संबंधों की पुष्टि करने वाली बेलनाकार मुहरें कालीबंगा से मिली हैं।
17. कालीबंगा में नगर की सुरक्षा के लिए किस प्रकार के परकोटे की व्यवस्था थी?
-यहां नगर के दोनों भाग यानी पश्चिमी दुर्ग और पूर्वी टीला अलग-अलग सुरक्षा दीवारों (दोहरे परकोटे) से घिरे हुए थे।
18. कालीबंगा से अंत्येष्टि यानी शव विसर्जन के कौन से तरीके प्राप्त हुए हैं?
-यहां शवों को दफनाने के तीन तरीके मिले हैं, जिनमें पूर्ण समाधिकरण, आंशिक समाधिकरण और दाह संस्कार शामिल हैं।
19. कालीबंगा से किस पालतू पशु की हड्डियां और खिलौना गाड़ी के पहिए मिले हैं?
-यहां से ऊंट की अस्थियां और मिट्टी से बनी खिलौना बैलगाड़ी के पहिए प्रचुर मात्रा में मिले हैं।
20. प्रसिद्ध इतिहासकार केयू आर कैनेडी के अनुसार कालीबंगा सभ्यता के पतन का मुख्य कारण क्या था?
-केयू आर कैनेडी के अनुसार इस समृद्ध सभ्यता के अंत का मुख्य कारण कोई भयंकर संक्रामक महामारी थी।
21. कालीबंगा सभ्यता की खोज और उत्खनन का सही क्रम और स्तर क्या है?
-कालीबंगा में खुदाई कुल 5 स्तरों में की गई थी। प्रथम 2 स्तर प्राक्-हड़प्पा काल के हैं और ऊपरी 3 स्तर विकसित हड़प्पा काल के हैं।
22. कालीबंगा से किस हिंसक या जंगली जानवर के चित्र वाली मिट्टी की मुहर मिली है?
-कालीबंगा से एक ऐसी मिट्टी की मुहर मिली है, जिस पर चीते (व्याघ्र) का चित्र अंकित है और उसके साथ एक स्त्री की आकृति भी बनी है।
23. कालीबंगा से प्राप्त चिरायु कब्र की आकृति कैसी है?
-यहां से एक विशेष अंडाकार कब्र मिली है, जिसे स्थानीय इतिहास में चिरायु कब्र कहा जाता है।
24. कालीबंगा के लोग घरों के दरवाजे किस तरफ खोलते थे?
-सिंधु घाटी सभ्यता के नियमों के अनुसार कालीबंगा के लोग अपने घरों के मुख्य दरवाजे मुख्य सड़क पर न खोलकर पीछे की तरफ गली (संकरे रास्ते) में खोलते थे।
25. कालीबंगा से किस देवी या देवता की मूर्ति या मृण्मूर्ति नहीं मिली है?
-कालीबंगा से मातृदेवी की एक भी मूर्ति नहीं मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि, यहां का समाज पुरुष-प्रधान या यज्ञ-प्रधान रहा होगा।
26. कालीबंगा में मकान बनाने के लिए ईंटों का अनुपात क्या था?
-कालीबंगा में प्रयोग की गई ईंटों की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई का अनुपात 4 : 2 : 1 (40cm x 20cm x 10cm) था।
27. कालीबंगा से प्राप्त तोल (माप-तौल) के बाट किस प्रकार के थे?
-यहां उत्खनन में घनाकार बांड या बाट मिले हैं, जो दशमलव प्रणाली और 16 के गुणक पर आधारित थे।
28. कालीबंगा में धान्य कोष्ठ या अनाज रखने के पात्र को स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता था?
-अनाज को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी के बड़े मटके या कोठे मिले हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में गोरे या कोट कहा जाता है।
29. कालीबंगा से सूती कपड़े में लिपटा हुआ कौन सा धातु का औजार या उपकरण मिला है?
-यहां सूती कपड़े में लिपटा हुआ तांबे का उस्तरा और तांबे की बनी कालीबंगा की विशेष चूड़ियां मिली हैं।
30. कालीबंगा को राजस्थान सरकार ने किस वर्ष संरक्षित स्मारक घोषित करके संग्रहालय स्थापित किया?
-कालीबंगा से प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 1983-85 में हनुमानगढ़ के कालीबंगा में ही एक विशेष संग्रहालय की स्थापना की।