7 May ka itihas: रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती और WWII में जर्मनी का सरेंडर, जानें आज की बड़ी घटनाएं

7 May ka itihas/Today in History Hindi News नई दिल्ली । इतिहास की किताब में 7 मई की तारीख एक ऐसी खिड़की है, जहां से हमें साहित्य की मिठास और युद्ध के अंत की शांति एक साथ दिखाई देती है। यह दिन जहां भारत के महान गौरव गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के जन्म का उत्सव मनाता है, वहीं विश्व पटल पर यह उस दिन के रूप में दर्ज है, जब मानवता ने तानाशाही के सबसे क्रूर अध्याय ‘नाजी शासन’ के अंत की घोषणा सुनी थी। आज के दिन ही मुंबई की सड़कों पर तकनीकी क्रांति दौड़ी थी और आज ही के दिन पत्रकारिता के सर्वोच्च सम्मान की नींव पड़ी थी। आइए, 7 मई के इतिहास के उन पन्नों को विस्तार से पलटते हैं, जिन्होंने हमारे आज को आकार दिया है।

साहित्य के शिखर पुरुष: गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म (1861)

7 मई 1861 का दिन भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। इसी दिन कोलकाता के विख्यात जोरासांको ठाकुरबाड़ी में रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ था। (Rabindranath Tagore Birthday)

कला और साहित्य का संगम (Today special day in India)

टैगोर केवल एक कवि नहीं थे; वे एक ऐसे युगदृष्टा थे, जिन्होंने अपनी लेखनी से भारतीय उपमहाद्वीप को दुनिया के सांस्कृतिक मानचित्र पर स्थापित किया। उनकी रचनाओं में प्रकृति, आध्यात्मिकता और मानवता का ऐसा संगम मिलता है, जो आज भी प्रासंगिक है। Today in History Hindi News.

नोबेल पुरस्कार और वैश्विक पहचान

वर्ष 1913 में उनकी कालजयी रचना ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। वे यह सम्मान पाने वाले न केवल पहले भारतीय थे, बल्कि पूरे एशिया के पहले व्यक्ति थे। उनके द्वारा रचित ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है, और उनके ही लिखे गीत ‘आमार शोनार बांग्ला’ को बांग्लादेश ने अपने राष्ट्रगान के रूप में अपनाया। 7 मई का दिन हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक है।

द्वितीय विश्व युद्ध: नाजी जर्मनी का बिना शर्त आत्मसमर्पण (1945)

7 मई 1945 वह ऐतिहासिक तारीख है, जिसने यूरोप में छह साल से चल रहे खूनखराबे को रोक दिया। यह दिन द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की सबसे बड़ी घोषणा का गवाह बना।

हिटलर की हार और शांति की ओर कदम

जर्मनी के जनरल गुस्ताव जोडल ने फ्रांस के रीम्स में मित्र राष्ट्रों (Allies) की सेना के सामने बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण (Unconditional Surrender) के दस्तावेजों पर दस्तखत किए। इस हस्ताक्षर ने एडोल्फ हिटलर के उस भयावह शासन के अंत पर मुहर लगा दी, जिसने पूरी दुनिया को विनाश की कगार पर खड़ा कर दिया था। इस खबर के साथ ही दुनिया भर में जश्न का माहौल बन गया और यूरोप ने विनाश के बाद पुनर्निर्माण की राह पकड़ी।  WWII Germany Surrender

भारत में ब्रिटिश हुकूमत और कुर्गु का विलय (1834)

7 मई 1834 का दिन भारतीय इतिहास में एक रियासत की स्वतंत्रता के अंत के रूप में याद किया जाता है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी दमनकारी नीतियों के तहत दक्षिण भारत के कुर्गु (Coorg) राज्य पर कब्जा कर लिया था।

अंग्रेजों ने कुर्गु के तत्कालीन शासक चिक्का वीरराजेंद्र को गद्दी से हटा दिया और पूरे राज्य को ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बना लिया। यह घटना दर्शाती है कि अंग्रेज किस तरह से अपनी कूटनीति और सैन्य शक्ति के बल पर भारत की छोटी-छोटी रियासतों को निगल रहे थे।

मुंबई की सड़कों पर तकनीकी क्रांति: बिजली वाली ट्राम (1907)

7 मई 1907 को मुंबई (तब बम्बई) ने आधुनिकता की ओर एक बड़ी छलांग लगाई थी। इसी दिन शहर की सड़कों पर पहली बार बिजली से चलने वाली ‘ट्राम कार’ शुरू की गई थी।

इससे पहले ट्राम को खींचने के लिए घोड़ों का उपयोग किया जाता था। बिजली से चलने वाली ट्राम की शुरुआत ने मुंबई को एक आधुनिक महानगर बनाने की दिशा में पहला कदम रखा। इसने सार्वजनिक परिवहन को तेज और सस्ता बनाया, जिससे आम जनता के जीवन में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आया।

पुलित्जर पुरस्कार: पत्रकारिता के नए मानक (1912)

आज की पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में ‘पुलित्जर पुरस्कार’ को सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है। इसकी शुरुआत की योजना को 7 मई 1912 को कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा औपचारिक मंजूरी दी गई थी। जोसेफ पुलित्जर के विजन ने दुनिया को एक ऐसा मंच दिया, जहां सच बोलने वाली कलम और समाज सुधारक लेखकों को सर्वोच्च सम्मान दिया जा सके।

ब्रिटेन में महिलाओं को बराबरी का अधिकार (1928)

लोकतंत्र के इतिहास में 7 मई 1928 का दिन महिलाओं के संघर्ष की जीत का प्रतीक है। इसी दिन ब्रिटिश सरकार ने महिलाओं के लिए मतदान की आयु सीमा को 30 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर दिया था। इस फैसले ने महिलाओं को पुरुषों के समान वोट देने का अधिकार दिया और विश्व स्तर पर लैंगिक समानता के आंदोलनों को एक नई ताकत दी। Mumbai Tram History

7 मई की अन्य प्रमुख वैश्विक घटनाएं

सोनी कॉर्पोरेशन (1946): जापान में आज ही के दिन ‘टोक्यो त्सुशिन कोग्यो के.के.’ की स्थापना हुई थी, जिसे आज हम दुनिया भर में ‘सोनी’ (Sony) के नाम से जानते हैं।

इंटीग्रेटेड सर्किट (1952): जियोफ्रे डमर ने पहली बार आज ही के दिन आईसी (IC) की अवधारणा पेश की थी, जिसने भविष्य के कंप्यूटर और स्मार्टफोन के लिए रास्ता साफ किया।

व्लादिमीर पुतिन (2012): रूस के शक्तिशाली नेता व्लादिमीर पुतिन ने आज ही के दिन तीसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी।

7 मई को जन्मे और दिवंगत हुए प्रमुख व्यक्तित्व

पांडुरंग वामन काणे (1880): भारत रत्न से सम्मानित महान विद्वान और संस्कृत के प्रकांड ज्ञाता का जन्म आज ही हुआ था।

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