Wireless Charging for Cars in India नई दिल्ली (PIB) । क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि, आपकी इलेक्ट्रिक कार सिर्फ सड़क पर दौड़ने के काम न आए, बल्कि बिजली संकट के समय आपके घर का लोड भी उठा ले? (India-EU EV Partnership) यह सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने इसे हकीकत बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। (Electric Vehicle Charging India) भारत सरकार की प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इटली के इस्प्रा में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल वर्कशॉप में भारत और यूरोप के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकों पर मुहर लगाई है, जो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि बिजली के बिल की टेंशन भी खत्म कर देगी।
क्या है यह जादुई तकनीक? (V2G का कमाल)
PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में ‘द्विदिशीय चार्जिंग’ (Bidirectional Charging) और ‘वाहन-से-ग्रिड’ (V2G) पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। अभी तक हम अपनी इलेक्ट्रिक कार को सिर्फ चार्ज करते हैं, यानी बिजली ग्रिड से कार में आती है। लेकिन इस नई तकनीक के बाद यह “टू-वे ट्रैफिक” बन जाएगा। इसका सीधा मतलब है।
इस रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली तकनीक का जिक्र है, वायरलेस विद्युत हस्तांतरण (WPT)। जी हां, अब आपको कार चार्ज करने के लिए भारी-भरकम केबल उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं, जिससे कार पार्किंग में खड़ी होते ही अपने आप चार्ज होने लगेगी। जैसे आज आपका स्मार्टफोन ‘वायरलेस पैड’ पर रखते ही चार्ज होता है, वैसे ही आपकी कार भी हवा से बिजली खींचेगी।
PIB के अनुसार, भारी वाहनों के लिए मेगावॉट चार्जिंग प्रणाली (MCS) पर भी समझौता हुआ है। यह इतनी सुपर-फास्ट तकनीक है कि विशालकाय ट्रकों और बसों को भी उतनी ही जल्दी चार्ज कर देगी जितनी देर में एक ड्राइवर चाय का ब्रेक लेता है। टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड जैसी भारतीय कंपनियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।
इटली की लैब में हुआ भविष्य का फैसला (Smart EV Charging Standard)
इस ऐतिहासिक मिशन का नेतृत्व भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) और यूरोपीय आयोग के विशेषज्ञ कर रहे हैं। भारतीय विशेषज्ञों के दल ने इटली में उन ‘सीक्रेट’ लैब का भी दौरा किया जहाँ भविष्य की इन जादुई बैटरियों और चार्जिंग स्टेशनों का टेस्ट चल रहा है। इस बैठक में टाटा मोटर्स, एबीबी, डेल्टा और स्कैनिया जैसी ग्लोबल कंपनियों के साथ-साथ आईआईटी मद्रास और एआरएआई (ARAI) के दिग्गज भी शामिल थे। इनका लक्ष्य है कि भारत और यूरोप में चार्जिंग के नियम और प्लग एक जैसे हों, ताकि उपभोक्ताओं को कहीं भी कोई दिक्कत न आए।
क्या आपकी पुरानी EV बेकार हो जाएगी? (भारत-यूरोपीय संघ ईवी समझौता)
बिल्कुल नहीं! इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ही “मानकीकरण” है। यानी आने वाले समय में पुराने और नए, सभी चार्जिंग स्टेशनों को एक ग्लोबल स्टैंडर्ड पर लाया जाएगा। भारत अब दुनिया के साथ मिलकर ऐसी तकनीक ला रहा है जिससे चार्जिंग न सिर्फ तेज होगी, बल्कि आम आदमी के बजट में भी होगी। क्या आप ऐसी कार खरीदना चाहेंगे जो आपके घर का बिजली बिल जीरो कर दे? हमें कमेंट में जरूर बताएं! सोर्स: प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB)- लिंक