Rewari News Today रेवाड़ी | कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत सच्ची, तो सफलता जमीन से उठकर आसमान तक पहुंच जाती है। रेवाड़ी के एक साधारण किसान ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, जिसकी गूंज अब राजभवनों और राष्ट्रपति भवन तक सुनाई दे रही है। (Rewari News) कुरुक्षेत्र में आयोजित विशाल किसान मेले के दौरान, गुजरात के माननीय राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रेवाड़ी के खोल निवासी प्रगतिशील किसान यशपाल खोला (Rewari Progressive Farmer Yashpal Khola) की पीठ थपथपाई। राज्यपाल ने न केवल उनके कार्यों की सराहना की, बल्कि उनके द्वारा स्थापित ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) के मॉडल को पूरे प्रदेश के लिए एक ‘मिसाल’ बताया। (Gujarat Governor Acharya Devvrat Kisan Mela, Natural Farming Haryana Model)
यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यशपाल खोला रेवाड़ी का वह चमकता सितारा हैं, जिन्हें इसी साल 26 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में एट होम कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति के विशेष मेहमान बनने का परम गौरव प्राप्त हुआ था। अब, राज्यपाल द्वारा उनकी सराहना ने साबित कर दिया है कि वे खेती की दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला रहे हैं।
प्राकृतिक खेती: राज्यपाल बोले- अनुशासन और गंभीरता की है जरूरत
मुलाकात के दौरान, राज्यपाल आचार्य देवव्रत, जो स्वयं प्राकृतिक खेती के बहुत बड़े समर्थक और प्रचारक हैं, ने यशपाल खोला और अरावली किसान क्लब (Aravali Kisan Club Rewari) के प्रयासों को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने यशपाल से विस्तार से चर्चा की कि, कैसे रासायनिक खेती (Chemical Farming) को छोड़कर प्राकृतिक तरीकों को अपनाया जा सकता है। राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि अगर प्राकृतिक खेती में मार्केटिंग (Marketing), प्रमाणिकरण (Certification) और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों को पूर्ण अनुशासन और गंभीरता के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो हरियाणा प्राकृतिक खेती के मामले में पूरे भारत देश के लिए एक ‘आदर्श मॉडल’ (Model State) बन सकता है।
राज्यपाल ने अरावली किसान क्लब द्वारा किए जा रहे कार्यों की विशेष सराहना की और कहा कि संगठित होकर काम करने से ही प्राकृतिक खेती को एक आंदोलन का रूप दिया जा सकता है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
धारूहेड़ा नेचुरल एग्रो फार्म की भूमिका को मिली सराहना
चर्चा के दौरान, राज्यपाल ने गुरुकुल कुरुक्षेत्र और यशपाल खोला द्वारा रेवाड़ी में संचालित धारूहेड़ा नेचुरल एग्रो फार्म की भूमिका को बेहद अहम और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान और फार्म अन्य किसानों के लिए एक ‘पाठशाला’ और ‘सीखने के केंद्र’ का काम कर रहे हैं। राज्यपाल ने माना कि जमीन पर काम कर रहे ऐसे किसानों के अनुभव अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर मोड़ने में सबसे ज्यादा कारगर साबित होंगे।