Ahirwal Politics Explainer: दक्षिण हरियाणा की सियासत (Ahirwal Politics) में इन दिनों पारा चढ़ा हुआ है। अहीरवाल के दो सबसे बड़े चेहरों केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के बीच की पुरानी अदावत अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मौका है 22 मार्च रविवार को गुरुग्राम के कांकरौला में होने वाली बड़ी रैली का। यह महज एक रैली नहीं, बल्कि 2029 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी ताकत दिखाने की एक बड़ी ‘अग्निपरीक्षा’ है। (Rao Inderjit Singh vs Rao Narbir Singh)
दबदबे की जंग: 1987 से 2026 तक का सफर
रेवाड़ी और दक्षिण हरियाणा की राजनीति पिछले एक दशक से भाजपा के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन उन्हें समय-समय पर राव नरबीर सिंह से कड़ी चुनौती मिलती रही है। (Rewari Political News)
इतिहास की गूंज: राजनीति के गलियारों में दोनों के बीच की जुबानी जंग हाल के महीनों (दिसंबर 2025 और जनवरी 2026) में काफी तेज रही है।
हार-जीत का हिसाब: जहां राव इंद्रजीत सिंह ने राव नरबीर को उनकी 2009 की हार याद दिलाई, वहीं नरबीर सिंह ने भी पलटवार करते हुए राव इंद्रजीत को 1987 की जाटुसाना वाली हार का आईना दिखाया।
राजनीतिक ताकत के मामले में भले ही अब तक राव इंद्रजीत सिंह का पलड़ा भारी रहा हो, लेकिन 2024 के बाद राव नरबीर सिंह एक नई ‘पुरानी फॉर्म’ में नजर आ रहे हैं।
पटौदी वाला ‘कलेश’ और रणनीति में बदलाव
इस रैली के पीछे की कहानी भी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है। पहले राव नरबीर सिंह ने बादशाहपुर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का निमंत्रण दिया। ठीक उसी दिन (22 मार्च) पटौदी की विधायक बिमला चौधरी ने भी एक कार्यक्रम रख दिया, जिसमें राव इंद्रजीत सिंह और उनकी बेटी आरती राव को आमंत्रित किया गया।
सियासी हलकों में इसे शक्ति प्रदर्शन की ‘काउंटर’ कोशिश माना गया। नतीजा यह हुआ कि राव नरबीर ने अपना आयोजन स्थल बदल दिया। हालांकि, बाद में राव इंद्रजीत की व्यस्तता का हवाला देकर बिमला चौधरी ने अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया, जिससे मैदान अब पूरी तरह राव नरबीर के लिए खाली है।
जर्मन तकनीक का पंडाल और 25 हजार कुर्सियां
राव नरबीर सिंह इस रैली को कितना गंभीर मान रहे हैं, इसका अंदाजा वहां की तैयारियों से लगाया जा सकता है।
वाटरप्रूफ पंडाल: एक जर्मन कंपनी को 400 बाई 800 फीट का भव्य वाटरप्रूफ पंडाल लगाने का जिम्मा दिया गया है।