Rewari News रेवाड़ी | हरियाणा के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। रेवाड़ी स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (IGU) में वाणिज्य, पर्यटन एवं प्रबंधन विभाग और कौशल संवर्धन केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन ने न केवल शैक्षणिक जगत में हलचल पैदा की है, बल्कि शोध (Research) की दुनिया में एक नए बदलाव की आहट भी दे दी है। Rewari News Hindi
इस दो दिवसीय ज्ञान के महाकुंभ में देशभर के विशेषज्ञों, कुलपतियों और शोधार्थियों ने शिरकत की। सम्मेलन का मुख्य केंद्र आत्मनिर्भर भारत और नवाचार (Innovation) रहा, जिसने उपस्थित 230 से अधिक प्रतिभागियों को भविष्य की नई राह दिखाई। IGU Rewari Updates
दिग्गज कुलपतियों ने दिया सफलता का महामंत्र
समापन सत्र की शुरुआत बेहद गरिमामयी रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसएन सचदेवा और एचएयू हिसार के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज ने शिरकत की। दोनों ही महानुभावों ने शिक्षा और शोध के गिरते स्तर को लेकर न केवल चिंता जताई, बल्कि उसे सुधारने के अचूक उपाय भी साझा किए। Education News Haryana
क्वालिटी बनाम क्वांटिटी: प्रो. बीआर कंबोज ने दो-टूक शब्दों में कहा कि आज के दौर में शोध पत्रों की संख्या बढ़ाना उपलब्धि नहीं है। असली उपलब्धि तब है जब आपका शोध समाज में कोई सकारात्मक बदलाव लाए। उन्होंने शोधार्थियों से ‘कॉपी-पेस्ट’ संस्कृति को छोड़कर मौलिकता (Originality) पर ध्यान देने का आह्वान किया। International Conference IGU
विज्ञान और कृषि का मेल: वहीं, प्रो. एसएन सचदेवा ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि भारत की तरक्की का रास्ता खेतों और प्रयोगशालाओं के एकीकरण (Integration) से होकर गुज़रता है। उन्होंने विज्ञान को कृषि से जोड़ने की ज़रूरत पर बल दिया ताकि ग्रामीण भारत भी डिजिटल और आर्थिक क्रांति का हिस्सा बन सके।
आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर भारत: प्रो. अश्वनी महाजन
सम्मेलन के मुख्य वक्ता और देश के जाने-माने अर्थशास्त्री प्रो. अश्वनी महाजन ने अपने संबोधन से हॉल में जोश भर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की बढ़ती ग्लोबल साख का ज़िक्र किया। प्रो. महाजन ने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर उम्मीद की नज़रों से देख रही है, और इस उम्मीद को पूरा करने की ज़िम्मेदारी हमारे युवा शोधार्थियों की है। उन्होंने सॉफ्ट स्किल्स और स्वदेशी तकनीक को अपनाने पर ज़ोर दिया ताकि भारत केवल बाज़ार न रहे, बल्कि दुनिया का ‘इनोवेशन हब’ बने।
आंकड़ों में आईजीयू का महा-सम्मेलन
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी के मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन ने सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए। सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए प्रो. रितु बजाज ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए।
भारी भागीदारी: इस कार्यक्रम में कुल 230 से ज्यादा प्रतिभागियों ने रजिस्ट्रेशन कराया।
हाइब्रिड मोड में शोध: कुल 140 शोध पत्र पढ़े गए। इसमें खास बात यह रही कि 85 शोधार्थियों ने ऑफलाइन (आमने-सामने) और 55 ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी बात रखी।