Rewari News रेवाड़ी । रेवाड़ी के गांव बालावास अहीर की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। गांव की तीन बार सरपंच रहीं और इलाके की जानी-मानी समाजसेवी शांति देवी (86) का गुरुवार शाम 4 बजे निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही गांव सहित पूरे जिले के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। शांति देवी न केवल एक कुशल प्रशासक थीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी थीं।
तीन बार संभाली गांव की कमान (BalawasAhir)
पूर्व डीईओ सुभाष चंद्र की माता शांति देवी का राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने 1995 से 2005 तक लगातार दो बार गांव की सरपंच के रूप में कमान संभाली। इसके बाद 2010 से 2016 तक वे तीसरी बार निर्वाचित हुईं। उल्लेखनीय है कि वे बालावास अहीर की प्रथम महिला सरपंच बनी थीं, जिसने उस दौर में रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़कर महिलाओं के लिए राजनीति के द्वार खोले। उनके कार्यकाल में गांव में शिक्षा, गलियों के पक्कीकरण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया।
परिवार और अंतिम विदाई
शांति देवी अपने पीछे एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार छोड़ गई हैं। उनके बड़े पुत्र अशोक कुमार सेवानिवृत्त अधीक्षक, डीईओ कार्यालय और छोटे पुत्र सुभाष चंद्र सेवानिवृत्त डीईओ, रेवाड़ी शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। शांति देवी का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 20 मार्च सुबह 11 बजे पैतृक गांव बालावास अहीर में किया जाएगा। उनके निधन पर क्षेत्र के विभिन्न सरपंचों और नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है। (ShantiDevi)