Rewari News रेवाड़ी । बावल क्षेत्र का गांव टाकड़ी अपनी वीरता, प्राचीन विरासत और सामाजिक सद्भाव के लिए पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है। दुर्गा सेवा समिति टाकड़ी के प्रधान रतन चौहान, उपप्रधान विनोद शर्मा (बबली पंडित) और सचिव राजकुमार यादव ने बताया कि, गांव की स्थापना का इतिहास बेहद दिलचस्प है। (Rewari News) दो बार उजड़ने के बाद तीसरी बार सन 1611 में नीमराणा के राजा पूरणमल के पुत्र रोहतास ने इसे बसाया था। (Indian Army)
पुराने समय में नाभा स्टेट के अधीन रहा यह गांव आज भी अपनी सामाजिक एकता और 415 साल पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है। समिति के सदस्यों के अनुसार गांव में 800 साल पुराना साधा मंदिर, 345 साल पुराना दुर्गा माता मंदिर और करीब 350 साल पुराना ठाकुर जी का मंदिर श्रद्धा के केंद्र हैं। (Rewari News) दुर्गा मंदिर में हर साल नवरात्रों के दौरान दो बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां की सबसे खास बात 24 बिरादरी का भाईचारा है, जहां आज भी पूरा गांव एक ही स्थान पर होली दहन करता है। प्राकृतिक रूप से गांव के पास स्थित अरावली की पहाड़ी (ऊंचाई करीब 750 फीट) पर पुलिस का रिपीटर स्टेशन बना हुआ है।
देशभक्ति टाकड़ी के रंग-रंग में है। कोषाध्यक्ष पुष्पेंद्र चौहान, हिमांशु और राकेश ने जानकारी दी है कि, गांव के करीब 500 से 600 जवान सेना में सेवाएं दे चुके हैं या वर्तमान में कार्यरत हैं। (Rewari News) ग्रामीणों की अपनी धार्मिक आस्था है कि, माता दुर्गा की कृपा से आज तक गांव का कोई भी जवान युद्ध में शहीद नहीं हुआ। (Rewari News) प्रशासनिक क्षेत्र में भी गांव का रिकॉर्ड शानदार है। (Rewari News) यहां से 2 जज, 1 आईएएस, 1 आईपीएस और 1 आईएफएस अधिकारी बने हैं। सैन्य अधिकारियों में 3 कर्नल, 25-30 कप्तान और 2 मैजर शामिल हैं।
6000 की आबादी होने के बावजूद गांव आज भी बुनियादी विकास के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यहां प्लस-टू स्कूल नहीं है, जिससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ता है। गांव का सरकारी पीएचसी आज भी एक निजी धर्मशाला में संचालित है। इसके अलावा सीवर लाइन, मीठे पानी की सप्लाई और गांव में बैंक की सुविधा न होने से बुजुर्गों को 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बस सेवा सीमित होने के कारण लोग निजी वाहनों पर निर्भर हैं।