Rajasthan News सवाई माधोपुर । राजस्थान के वन्यजीव गलियारों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने टूरिज्म इंडस्ट्री और टाइगर प्रेमियों में उत्साह भर दिया है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve), जो वर्तमान में ‘ओवरक्राउडिंग’ की समस्या से जूझ रहा है, उसके लिए अब एक ‘सेफ्टी वॉल्व’ तैयार किया जा रहा है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर, सालों से बंद पड़े आईओसी (IOC) प्लांट की जमीन पर नया टाइगर सफारी पार्क बनाने का खाका तैयार हो चुका है। Ranthambore Space Crisis
स्पेस क्राइसिस: जब जंगल छोटा पड़ जाए और कुनबा बड़ा हो जाए
रणथंभौर का कुल क्षेत्रफल लगभग 1700 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन बाघों के रहने लायक ‘कोर एरिया’ सीमित है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की रिसर्च कहती है कि, इस जंगल की पारिस्थितिकी (Ecology) अधिकतम 50 बाघों को संभालने में सक्षम है। लेकिन आज यहां 76 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं।
इसका परिणाम क्या हो रहा है?
टेरिटोरियल फाइट: पिछले कुछ सालों में बाघों के बीच आपसी संघर्ष में कई मौतें हुई हैं। युवा बाघ अपनी सल्तनत बनाने के लिए बुजुर्ग बाघों पर हमला कर रहे हैं। Tiger Safari Park Sawai Madhopur
माइग्रेशन का खतरा: जगह न मिलने के कारण बाघ अक्सर कॉरिडोर (कैलादेवी या रामगढ़ विषधारी) की तलाश में असुरक्षित रास्तों पर निकल जाते हैं। IOC Plant Tiger Project
इंसानी दखल: जब बाघ जंगल की सीमा लांघते हैं, तो सवाई माधोपुर के रिहायशी इलाकों में दहशत फैल जाती है।
IOC प्लांट: एक ‘रेडीमेड’ जंगल जो बनेगा बाघों का आशियाना
सवाई माधोपुर स्थित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का यह प्लांट 23 साल पहले बंद हुआ था। 100 बीघा में फैला यह इलाका आज एक प्राकृतिक जंगल का रूप ले चुका है। यहां 8 फीट ऊंची पक्की दीवार पहले से मौजूद है, जो सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है।
रेडीमेड जंगल की क्या रहेंगी खास बातें
रिटायरमेंट होम: यहां उन ‘रिटायर्ड’ बाघों को रखा जाएगा, जो अब शिकार करने में सक्षम नहीं हैं या घायल हैं।
नेचुरल एनक्लोजर: पिंजरों के बजाय यहां बड़े बाड़े (Enclosures) बनाए जाएंगे, ताकि बाघों को महसूस हो कि वे अपने प्राकृतिक घर में ही हैं।