Income Tax Raid in Jaipur-Ajmer Restaurants: जयपुर/अजमेर। राजस्थान के जायके और लग्जरी लाइफस्टाइल के शौकीनों के लिए मशहूर रोसाडो और मैंगो मसाला जैसे बड़े नाम इन दिनों आयकर विभाग (Income Tax) के राडार पर हैं। (Rajasthan Breaking) इनकम टैक्स की टीम की फिर रविवार दोपहर से शुरू हुई छापेमारी सोमवार को दूसरे दिन भी नॉन-स्टॉप जारी है। विभाग की पैनी नजर जयपुर के तीन और अजमेर के एक हाई-प्रोफाइल रेस्टोरेंट पर है, जहां दस्तावेजों के अंबार और डिजिटल डेटा के बीच टैक्स चोरी के सुराग तलाशे जा रहे हैं। इस बार सूत्रों के अनुसार, टीम को बड़े इनपुट मिले हैं, जिसके चलते कुछ बड़ा खुलाशा हो चुका है। इनकम टैक्स विभाग के एक बड़े अधिकारी से न्यूज वॉइस समाचार मीडिया को यह जानकारी मिली है। हालांकि, फिलहाल विभाग के अधिकारी लगातार सर्च कर रहे हैं।
Income Tax Raid in Jaipur-Ajmer Restaurants: इन हॉटस्पॉट्स पर चल रही है सर्जिकल स्ट्राइक
आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने पूरी प्लानिंग के साथ इन ठिकानों को घेरा है:
रोसाडो (Rosado) बार एंड रेस्टोरेंट: गांधी पथ (वैशाली नगर) स्थित जयपुर का सबसे ऊंचा और चर्चित बार।
कबाब्स एंड करीज (Kebabbs & Curries): राजापार्क का वो कोना, जहां शाम ढलते ही जायके के शौकीनों का जमावड़ा लगता है।
द पार्क पैलेस (The Park Palace): अजमेर रोड स्थित यह वेन्यू बड़े आयोजनों का केंद्र है।
मैंगो मसाला (Mango Masala): अजमेर के स्वामी कॉम्प्लेक्स चौराहा स्थित शहर का सबसे पुराना और भरोसेमंद रेस्टोरेंट।
न्यूज वॉइस इनसाइट: आखिर क्यों पड़ी रेड?
सूत्रों के मुताबिक, यह महज रूटीन सर्वे नहीं है। इसके पीछे तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं।
-कैश का काला खेल: विभाग को इनपुट मिला था कि, इन रेस्टोरेंट्स में बिलिंग का एक बड़ा हिस्सा कच्चे पर्चों पर हो रहा है, जिसे मुख्य अकाउंट बुक्स में दिखाया ही नहीं गया।
डिजिटल फुटप्रिंट बनाम डिक्लेयर्ड इनकम: ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स और कार्ड पेमेंट का डेटा तो रिकॉर्ड में था, लेकिन काउंटर पर होने वाली भारी कैश सेल को छिपाया जा रहा था।
लक्जरी एक्सपेंशन: जिस तेजी से इन ग्रुप्स ने नए आउटलेट्स और इंटीरियर पर करोड़ों खर्च किए, वो उनकी घोषित आय (Declared Income) से मेल नहीं खा रहा था।
दूसरे दिन क्या हुआ? (लेटेस्ट अपडेट)
सोमवार सुबह से ही आयकर विभाग की टीमें मैनेजमेंट और अकाउंट्स स्टाफ को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर रही हैं।
डॉक्यूमेंट सीज: पिछले 3 सालों के सेल-परचेज रजिस्टर और स्टॉक बुक को कब्जे में ले लिया गया है।
डिजिटल जब्ती: हार्ड डिस्क और मोबाइल क्लोनिंग के जरिए व्हाट्सएप चैट्स खंगाली जा रही हैं, ताकि गुप्त निवेश का पता चल सके।
लॉकर्स पर नजर: प्रमोटर्स के निजी बैंक खातों और लॉकर्स की जानकारी भी जुटाई जा रही है।