Pakistan Economic Crisis 2026 इस्लामाबाद/नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट के रण में खुद को ‘ग्लोबल चौधरी’ साबित करने निकले पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी फजीहत हुई है कि, अब उसे दुनिया में मुंह छिपाने की जगह नहीं मिल रही। जिस ईरान को अपना करीबी बताकर पाकिस्तान अमेरिका के साथ Iran-US Ceasefire (Iran-US Ceasefire News News) कराने चला था, उसी ईरान ने पाकिस्तान को दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंक दिया है। कूटनीतिक हार तो हुई ही, साथ ही (UAE Pakistan Debt Refund) के भारी दबाव ने पाकिस्तान के कंगाली वाले जख्मों पर तेजाब डालने का काम किया है।
ईरान ने इस्लामाबाद को माना अछूत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पिछले कई दिनों से हवा में महल बना रहे थे कि, वे अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर युद्ध रुकवा देंगे। पाकिस्तान का दावा था कि, वह दोनों देशों के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है। लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इस गुब्बारे की हवा निकाल दी है। ईरान ने साफ लहजे में कह दिया है कि, उसे पाकिस्तान की नीयत पर शक है और वह इस्लामाबाद की धरती पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की मेज साझा नहीं करेगा।
ईरान का यह कड़ा रुख सीधे तौर पर Shahbaz Sharif Diplomatic Failure को दर्शाता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि, अमेरिका द्वारा रखी गई 15 शर्तें उसे मंजूर नहीं हैं। इस कूटनीतिक अपमान के बाद अब चर्चा है कि, ईरान बातचीत के लिए तुर्किए या कतर जैसे देशों को चुन सकता है, जिसने पाकिस्तान की क्षेत्रीय साख को पूरी तरह मिट्टी में मिला दिया है।
UAE ने आर्थिक मोर्चे पर दिया 440 वोल्ट का झटका
अभी कूटनीतिक मोर्चे पर लगी आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि, पाकिस्तान के तथाकथित भाईजान यानी संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी असली औकात दिखा दी। पाकिस्तान इस समय Pakistan Economic Crisis 2026 के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, और ऐसे में UAE ने अपने 3.5 अरब डॉलर (करीब 29 हजार करोड़ रुपये) तुरंत वापस मांग लिए हैं।
एक तरफ पाकिस्तान का खजाना खाली है और दूसरी तरफ विदेशी कर्ज का पहाड़। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि, अबू धाबी अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। इस मोटी रकम की वापसी का सीधा मतलब है कि, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 18 प्रतिशत तक गिर जाएगा। इससे Pakistani Rupee Value में ऐतिहासिक गिरावट आने की आशंका है और आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो जाएगा।
सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां क्यों हैं अलर्ट?
भारत की सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि, जब भी पाकिस्तान इस तरह के चौतरफा संकट में फंसता है, तो वह अपनी घरेलू जनता का ध्यान भटकाने के लिए सीमा पर खुराफात शुरू कर देता है। राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर जैसे बॉर्डर वाले जिलों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि, अपनी इस बेइज्जती का गुस्सा पाकिस्तान सीमा पर घुसपैठ या तस्करी के जरिए निकालने की कोशिश कर सकता है। (India News Today, Hindi News Today)
ट्रंप की धमकी और पाकिस्तान का डर
पाकिस्तान की घबराहट के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका में Donald Trump Iran Policy भी है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को पाषाण युग में भेजने की धमकी दे दी है। पाकिस्तान को डर था कि, अगर वह बीच-बचाव नहीं करा पाया, तो आने वाले समय में उसे अमेरिका और ईरान दोनों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। ईरान के नए राष्ट्रपति भी शांति तो चाहते हैं, लेकिन वे पाकिस्तान जैसे अस्थिर देश को अपना वकील बनाने के पक्ष में कतई नहीं हैं।