Nagaur Breaking News नागौर/मेड़ता । कुदरत का कहर जब टूटता है, तो इंसान बेबस खड़ा तमाशा देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाता। नागौर और डीडवाना-कुचामन जिले में मंगलवार को आई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और व्यापारियों की साल भर की मेहनत को चंद घंटों में मटियामेट कर दिया। नागौर और मेड़ता की कृषि मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी करीब 80 हजार बोरियां बारिश के पानी में तैरती नजर आईं। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इस तबाही से 35 करोड़ रुपए से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है।
मंडियों में मची चीख-पुकार: खुले में तैर रहा ‘काला सोना’
नागौर कृषि मंडी में सुबह जब बारिश शुरू हुई, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि, यह तबाही लेकर आएगी। (nagaur mandi news today) देखते ही देखते मंडी परिसर दरिया बन गया। नागौर कृषि मंडी व्यापार मंडल के अध्यक्ष मूल चंद भाटी ने बताया कि, अकेले नागौर मंडी में करीब 50 हजार बोरियां भीग गई हैं, जिससे 20 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान हुआ है। इसमें 12 करोड़ रुपए का ‘काला सोना’ यानी जीरा (करीब 6 हजार क्विंटल) पूरी तरह खराब हो गया है। (nagaur mandi bhav) इसके अलावा ईसबगोल, सौंफ, मूंग और रायड़ा की बोरियां भी पानी की भेंट चढ़ गईं।
मेड़ता मंडी का हाल भी इससे जुदा नहीं था। (merta mandi news) वहां करीब 30 हजार बोरियां भीगने से 15 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि, शेड की कमी के कारण फसलें खुले में पड़ी थीं, और अचानक आई बारिश ने संभलने का मौका तक नहीं दिया। (nagaur weather update)
सिस्टम पर सवाल: शेड की कमी या लापरवाही?
हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाली इन मंडियों की हालत यह है, कि आज भी हजारों क्विंटल अनाज खुले आसमान के नीचे रखने को मजबूर हैं। (nagaur news today) व्यापारियों और किसानों का एक ही सवाल है, आखिर कब तक शेड की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा? बारिश की चेतावनी के बावजूद पुख्ता इंतजाम न होना प्रशासन और मंडी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। (nagaur news hindi)
खेतों में बिछ गई फसल: किसानों के छलके आंसू
मंडियों के बाहर खेतों का मंजर और भी डरावना है। (rajasthan rain news) डेगाना में हुई ओलावृष्टि और डीडवाना-कुचामन के बांठड़ी व रणसिसर क्षेत्र में भारी बारिश ने गेहूं और सौंफ की खड़ी फसलों को जमींदोज कर दिया है। किसान धन्नाराम के शब्द कलेजा चीर देने वाले हैं, तीन दिन पहले ओलों ने मारा था, आज बारिश ने सबकुछ खत्म कर दिया। अब घर चलाने का सहारा भी नहीं बचा। (farmers loss in nagaur)