LPG crisis in india: उद्योगों की गैस सप्लाई में 35% तक की कटौती, क्या अब आम आदमी की रसोई के साथ बजट भी बिगड़ेगा?

LPG crisis in india नई दिल्ली | मिडल ईस्ट के तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने कड़ा फैसला लिया है। सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है। प्राथमिकता साफ कर दी गई है कि, पहले देश की आम जनता का चूल्हा जलेगा और उसके बाद उद्योगों का पहिया घूमेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, उद्योगों की गैस में की गई यह कटौती यानी आपकी ही जेब पर भारी पड़ने वाली है?

कटौती का गणित: किस सेक्टर पर कितनी गाज? (LPG crisis in india)

सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गैस वितरण का नया चार्ट जारी किया है। इसके मुताबिक घरेलू पीएनजी और सीएनजी को पूरी सप्लाई दी जाएगी, लेकिन उद्योगों के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं।
रिफाइनरी और पावर सेक्टर: सबसे बड़ी कटौती यहीं हुई है। इन्हें मिलने वाली गैस में 35 प्रतिशत की कमी की गई है।
फर्टिलाइजर यानी खाद उद्योग: यहां 30 प्रतिशत तक सप्लाई घटा दी गई है।
चाय और अन्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स: इन्हें अपनी जरूरत का केवल 80 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाएगा।

उद्योग प्रभावित हुए तो आम जनता का क्या नुकसान?

जब हम कहते हैं कि उद्योगों की गैस कटी है, तो इसका मतलब सिर्फ फैक्ट्रियों का काम धीमा होना नहीं है। यह एक चेन रिएक्शन है जो सीधे आपके घर तक पहुंचता है।
महंगी होगी आपकी थाली: भारत में खाद के उत्पादन के लिए नेचुरल गैस सबसे जरूरी कच्चा माल है। जब खाद फैक्ट्रियों को 30 प्रतिशत कम गैस मिलेगी, तो उत्पादन गिरेगा। खाद की कमी या उसकी बढ़ी हुई लागत का सीधा असर खेती पर पड़ेगा। नतीजा यह होगा कि आने वाले समय में अनाज, दालें और सब्जियां महंगी हो सकती हैं।
बिजली बिल में लग सकता है करंट: देश के कई बड़े बिजली घर गैस से चलते हैं। 35 प्रतिशत सप्लाई कटने का मतलब है बिजली उत्पादन में बड़ी गिरावट। इस कमी को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियों को दूसरे महंगे विकल्पों का सहारा लेना होगा, जिसकी वसूली अंत में आम उपभोक्ता के बिजली बिल को बढ़ाकर ही की जाएगी।
रोजमर्रा की चीजों के दाम में उछाल: कांच, लोहे, स्टील और टाइल्स जैसे उद्योगों में गैस का भारी इस्तेमाल होता है। जब उत्पादन की लागत बढ़ती है, तो कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए उत्पादों की कीमतें बढ़ा देती हैं। इसका मतलब है कि घर बनाना या नई गाड़ी खरीदना अब और महंगा हो सकता है।
होटल और बाहर का खाना: कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पहले ही सीमित कर दी गई है। उद्योगों पर इस दबाव के कारण होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर भी प्रभावित होगा। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटलों तक, खाने की प्लेट की कीमत बढ़ना तय माना जा रहा है।

सरकार की रणनीति और चुनौतियां

सरकार ने तेल रिफाइनरियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पेट्रोकेमिकल का उत्पादन घटाकर एलपीजी का उत्पादन 10 प्रतिशत तक बढ़ाएं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि रिफिल बुकिंग की लाइनों को कम किया जा सके। सरकार की कोशिश है कि घरेलू गैस की किल्लत न हो, जिससे जनता में असंतोष न फैले। एक बहुत बड़े उद्योगपति के मुताबिक, सरकार फिलहाल राजनीतिक जोखिम कम करने की कोशिश कर रही है। घरों की गैस बंद होना एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है, इसलिए उद्योगों को फिलहाल कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, उद्योगों की यह सुस्ती लंबे समय में देश की जीडीपी और रोजगार पर भी असर डाल सकती है।

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