Kashmir highway tunnel update नई दिल्ली | जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) का सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक ऐसी खबर आई है, जो किसी बड़े सपने के सच होने जैसी है। अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई सैलानी या ट्रक ड्राइवर जम्मू से श्रीनगर की ओर निकलता है, तो उसके मन में एक अनजाना डर हमेशा बना रहता था, वह डर था रामबन-बनिहाल के बीच का वह खतरनाक रास्ता, जहां से गुजरते वक्त आसमान से मौत बनकर पत्थर बरसते थे। लेकिन अब, Kashmir highway tunnel update के साथ यह सारा खौफ इतिहास बनने जा रहा है।
केंद्र सरकार की एक महात्वाकांक्षी परियोजना के तहत Digdol Panthyal twin tube tunnel का निर्माण अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। ₹866.37 करोड़ की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही यह सुरंग न केवल सफर को सुरक्षित बनाएगी, बल्कि Jammu to Srinagar travel time को भी इतना कम कर देगी कि लोग घंटों का सफर मिनटों में पूरा करेंगे।
क्यों जरूरी था ‘इस नाले’ का विकल्प?
NH-44 का डिगडोल से पंथ्याल वाला हिस्सा भू-वैज्ञानिक रूप से बहुत ही कच्चा और संवेदनशील है। यहां की पहाड़ियां मिट्टी और ढीली चट्टानों से बनी हैं। ज़रा सी बारिश या तेज़ हवा चलने पर यहां बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगते थे, जिसे तकनीकी भाषा में शूटिंग स्टोन्स कहा जाता है। दशकों से इस रास्ते ने हज़ारों लोगों की जान ली है और हफ़्तों तक ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा की है। अक्सर NH 44 Ramban Banihal road status चेक करने पर पता चलता था कि रास्ता बंद है।
अब सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाल लिया है। पहाड़ के ऊपर से जाने वाले उस खतरनाक रास्ते को छोड़कर अब गाड़ियां पहाड़ के अंदर बनी Digdol Panthyal twin tube tunnel से गुजरेंगी। इसका मतलब है कि अब ऊपर से पत्थर गिरें या बर्फबारी हो, सुरंग के अंदर चल रहे वाहनों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
चित्रः जम्मू-कश्मीर के रामबन में NH-44 पर डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल देश के बुनियादी ढांचे में एक बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक इंजीनियरिंग का यह बेजोड़ नमूना 2022 से चल रहे चार लेन निर्माण कार्य का हिस्सा है। एक जटिल हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह टनल रामबन और बनिहाल के बीच सुरक्षा और संपर्क को मजबूत करेगी। इस पूरी परियोजना की लागत ₹866.37 करोड़ है। सरकार का यह प्रयास जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा का समय कम करने में सहायक होगा।
5 मिनट का सफर: बदल जाएगी कश्मीर की तकदीर
स्थानीय निवासी और यात्री इस बदलाव को अपनी आंखों से देख रहे हैं। दिगडोल के रहने वाले रतन बताते हैं, “पहले यहां एक पत्थर गिरने का मतलब था कई दिनों का इंतजार। एम्बुलेंस फंसी रहती थी, खाने-पीने का सामान खराब हो जाता था। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि Kashmir jane ka naya rasta लगभग तैयार है। अब जो दूरी तय करने में 1 से 2 घंटे लगते थे, वह अब सिर्फ 5 मिनट में पूरी हो जाएगी।”
यह बदलाव केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए भी संजीवनी है। कश्मीर से आने वाले सेब के ट्रक अक्सर जाम में फंसकर खराब हो जाते थे, जिससे किसानों को करोड़ों का नुकसान होता था। अब ऑल वेदर कनेक्टिविटी (हर मौसम में संपर्क) होने से सप्लाई चेन कभी नहीं टूटेगी।
यह कोई साधारण सुरंग नहीं है। इसे New Austrian Tunneling Method (NATM) तकनीक से बनाया गया है। हिमालय जैसे कच्चे पहाड़ों में खुदाई करना बहुत चुनौतीपूर्ण था, लेकिन साल 2022 से दिन-रात काम करके इंजीनियरों ने इसे संभव कर दिखाया है।
प्रोजेक्ट की लंबाई: उत्तर दिशा में 2.6 किमी और 0.619 किमी की सुरंगें, जबकि दक्षिण की ओर 3.08 किमी लंबी सुरंग।
मौजूदा स्थिति: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, परियोजना का 87.2% भौतिक कार्य पूरा हो चुका है।
सुरक्षा के इंतजाम: सुरंग के अंदर आधुनिक लाइटिंग, वेंटिलेशन और फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
रणनीतिक महत्व: सेना के लिए बड़ी ताकत
इस सुरंग का एक और बड़ा पहलू इसका रणनीतिक महत्व है। जम्मू-कश्मीर एक सीमावर्ती क्षेत्र है और यहां भारतीय सेना की आवाजाही साल भर बनी रहती है। भारी बर्फबारी के दौरान जब हाईवे बंद हो जाता था, तो रसद और सैनिकों को भेजने में दिक्कत आती थी। अब Kashmir highway tunnel update के बाद सेना के काफिले बिना किसी रुकावट के सीमा तक पहुँच सकेंगे। इससे आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना संभव होगा।
निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत
रामबन-बनिहाल खंड पर बन रही यह ट्विन ट्यूब सुरंग कश्मीर के विकास की नई लाइफलाइन है। जब यह पूरी तरह शुरू होगी, तो NH 44 Ramban Banihal road status हमेशा के लिए सुधर जाएगा। अब यात्रियों को आसमान की ओर देखकर डरने की ज़रूरत नहीं होगी, बल्कि वे सुरक्षित तरीके से कश्मीर की वादियों का लुत्फ उठा सकेंगे।