Jodhpur Court News जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने समाज में रिश्तों की परिभाषा को नए सिरे से लिख दिया है। अक्सर हम ‘पुत्र मोह’ में माता-पिता को गलतियों पर पर्दा डालते देखते हैं, लेकिन जोधपुर की एक बहादुर मां ने अपनी बहू की अस्मत की खातिर अपने ही सगे बेटे को सलाखों के पीछे भेज दिया। जोधपुर पॉक्सो स्पेशल कोर्ट (Jodhpur POCSO Court) ने इस मामले में आरोपी को 10 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई है। Jodhpur News, Jodhpur Court, Rajasthan News, Crime News India
Jodhpur POCSO Court: क्या था पूरा मामला?
यह सनसनीखेज मामला जोधपुर के पीपाड़ थाने के एक गांव का है। घटना जुलाई 2021 की है, जब एक परिवार की मर्यादा को उसी के बड़े बेटे ने तार-तार करने की कोशिश की।
छोटी बहू पर बुरी नजर: आरोपी ने घर की छोटी बहू के साथ उस वक्त दुराचार का प्रयास किया, जब वह सो रही थी। बहू के शोर मचाने पर उसकी सास मौके पर पहुंच गई, जिसे देख आरोपी बेटा भाग निकला।
बड़ी बहू का भी हुआ था उत्पीड़न: जांच में सामने आया कि, आरोपी पहले भी बड़ी बहू के साथ दोपहर में उस वक्त दुराचार कर चुका था, जब वह घर से बाहर गई थी। लोक-लाज और परिवार की बदनामी के डर से उस वक्त मामला दब गया था, लेकिन छोटी बहू के साथ हुई दोबारा हरकत ने इस राज को खोल दिया।
‘न्यायप्रिय मां’ की गवाही बनी निर्णायक मोड़
इस केस में मां अपनी बहुओं के साथ ढाल बनकर खड़ी हो गई। राजस्थान की इस मां ने न केवल पुलिस में आरोपी बेटे के खिलाफ बयान दर्ज कराए, बल्कि कोर्ट में भी अपने स्टैंड पर कायम रही। अदालत में गवाही देते हुए मां ने ममता को न्याय के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने जज के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि “मेरा बेटा अपराधी है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” आमतौर पर ऐसे घरेलू मामलों में गवाह मुकर जाते हैं, लेकिन मां की इस अडिग सच्चाई ने आरोपी को सजा के मुहाने तक पहुंचाया।
जज ने सुनाई सजा, रामचरितमानस की चौपाई का दिया हवाला
पॉक्सो विशेष अदालत (POCSO Special Court) के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने इस फैसले को ऐतिहासिक बनाते हुए भारतीय संस्कारों और नैतिकता का जिक्र किया। जज ने अपने फैसले में रामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई को उद्धृत किया। “अनुजवधू भगिनी सुतनारी, कन्या सम एति चारि। एहि को देख कुदृष्टि से, ताहि बधे कछु पाप न होई। यानी छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी और अपनी बेटी ये चारों बेटी के समान होती हैं। जो व्यक्ति इन पर कुदृष्टि डालता है, उसे दंडित करना अधर्म नहीं बल्कि धर्म है। अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 साल की सख्त कैद और 85 हजार रुपये के अर्थदंड (Fine) की सजा सुनाई।
गूगल डिस्कवर के लिए खबर का विश्लेषण
सामाजिक संदेश: यह खबर समाज को संदेश देती है कि ‘अपराध’ चाहे घर के भीतर हो या बाहर, चुप्पी साधना अपराधी का साथ देना है।