Iran-US War Update नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां शांति की आखिरी उम्मीद भी धुंधली पड़ती दिख रही है। India Iran Oil News ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा दो हफ्ते का अस्थायी सीजफायर यानी युद्धविराम खत्म होने की कगार पर है, और संकेत अच्छे नहीं हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पाकिस्तान दौरा विफल होने के बाद अब गेंद ईरान के पाले में है। Iran Oil Export Blockade अगर दो हफ्ते का समय बीत गया और ईरान ने झुकने से इनकार कर दिया, तो डोनाल्ड ट्रंप अपनी उस रणनीति को अंजाम दे सकते हैं जो एशिया की अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर भारत और चीन को हिला कर रख देगी। Donald Trump Iran Policy
पाकिस्तान वार्ता की विफलता: शांति का आखिरी मौका हाथ से निकला?
इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की मैराथन बातचीत के बाद जेडी वेंस खाली हाथ लौटे हैं। अमेरिका का कहना है कि उन्होंने अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव ईरान को दे दिया है। वेंस के कड़े तेवर बताते हैं कि, अमेरिका अब और रियायत देने के मूड में नहीं है। अब सवाल यह है कि, यदि सीजफायर खत्म हुआ, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास वे कौन से दो विकल्प हैं जो दुनिया का नक्शा बदल सकते हैं? JD Vance Pakistan Visit
विकल्प 1: बमबारी और पाषाण युग की वापसी
ट्रंप का पहला और सबसे आक्रामक विकल्प है, ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु केंद्रों पर सीधी बमबारी। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि, वह तेहरान को पाषाण युग यानी स्टोन एज में भेजने की ताकत रखते हैं। यह विकल्प सीधे तौर पर एक महायुद्ध की शुरुआत होगा, जिसकी लपटें पूरी दुनिया को झुलसाएंगी। USS Gerald Ford Persian Gulf
विकल्प 2: वेनेजुएला मॉडल और नौसैनिक घेराबंदी
ट्रंप जिस दूसरे विकल्प की ओर इशारा कर रहे हैं, वह है ईरान की नौसैनिक घेराबंदी। यह वही सफल रणनीति है जो अमेरिका ने वेनेजुएला के निकोलस मादुरो को घुटने पर लाने के लिए अपनाई थी।
अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना: अमेरिका अपनी नौसेना के जरिए फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण कर सकता है।
तेल निर्यात पर ताला: अगर अमेरिकी युद्धपोत खर्ग द्वीप और ओमान के संकरे रास्तों को ब्लॉक कर देते हैं, तो ईरान की तेल की आमदनी पूरी तरह बंद हो जाएगी।
भारत और चीन पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि, ट्रंप का दूसरा विकल्प यानी घेराबंदी युद्ध से भी ज्यादा घातक हो सकती है, खासकर भारत और चीन के लिए।