Iran-Israel War Breaking नई दिल्ली | अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग के 13वें दिन भारत के लिए राहत भरी और बेहद बड़ी खबर सामने आई है। हफ्तों से समुद्र में फंसे संकट और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई रुकने के डर के बीच अब भारतीय जहाजों के लिए रास्ता साफ हो गया है। भारत और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों में हुई तीन दौर की उच्चस्तरीय बातचीत के बाद यह सकारात्मक संकेत मिले हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच समुद्री सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर गहन चर्चा हुई है। भारत की कूटनीति के चलते अब भारतीय झंडे वाले जहाजों को ईरान के प्रभाव वाले समुद्री क्षेत्रों से सुरक्षित निकलने का भरोसा मिला है।
एक्सप्लेनर: आसान भाषा में समझें पूरी खबर का मतलब
आखिर मामला क्या है और भारत क्यों परेशान था?
ईरान और इजराइल के बीच पिछले 13 दिनों से युद्ध चल रहा है। इस युद्ध की वजह से समुद्र का वो रास्ता (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य) खतरे में पड़ गया था, जहां से दुनिया का सबसे ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत तेल समुद्री रास्तों से ही मंगाता है। अगर ईरान इन रास्तों को बंद कर देता या भारतीय जहाजों को निशाना बनाया जाता, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत हो सकती थी।
भारत ने ईरान को कैसे मनाया?
यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। पिछले कुछ दिनों में भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच 3 बार फोन पर लंबी बात हुई। भारत ने ईरान को समझाया कि हमारा इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है और हमारे व्यापारिक जहाजों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। भारत ने ईरान के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का वास्ता दिया। हाल ही में भारत के विदेश सचिव ने ईरानी दूतावास जाकर उनके दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि भी दी थी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघली।
हरी झंडी मिलने का मतलब क्या है?
इसका मतलब यह है कि, अब भारतीय व्यापारिक जहाज और तेल के टैंकर बिना डरे उन रास्तों से गुजर सकेंगे। ईरान ने भरोसा दिया है कि वह भारतीय जहाजों के रास्ते में रुकावट नहीं बनेगा। इसे अंतरराष्ट्रीय भाषा में समुद्री शिपिंग की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा कहा जाता है। अब खाड़ी देशों से आने वाला कच्चा तेल बिना किसी देरी के भारत के बंदरगाहों तक पहुंच सकेगा।
क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा या महंगा नहीं होगा?
एक बहुत बड़े विशेषज्ञ ने न्यूज वॉइस को बताया कि, जंग शुरू होने के बाद डर था कि, तेल के दाम 100 डॉलर के पार चले जाएंगे, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता। लेकिन अब रास्ता साफ होने से सप्लाई नहीं रुकेगी। जब सप्लाई बनी रहती है, तो कीमतें काबू में रहती हैं। यानी इस मंजूरी के बाद अब आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक्स्ट्रा बोझ पड़ने का खतरा टल गया है।