ऑस्ट्रेलिया की तकनीक से कुरुक्षेत्र का किसान बना करोड़पति, 3 एकड़ में 1.5 करोड़ की कमाई

High-tech nursery Haryana कुरूक्षेत्र | भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अक्सर खेती को घाटे का सौदा या मजबूरी का काम माना जाता है। लेकिन हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के एक छोटे से गांव निवारसी के युवा किसान मोहित ने इस पुरानी धारणा को जड़ से उखाड़ फेंका है। ऑस्ट्रेलिया से हॉर्टिकल्चर (बागवानी) की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, मोहित ने अपनी पुश्तैनी मिट्टी में आधुनिक तकनीक का ऐसा बीज बोया कि आज वह देश के लाखों युवाओं के लिए एक एग्रीकल्चरल आइकन बन चुके हैं। मात्र 3 एकड़ की जमीन पर सालाना 1.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत की एक लंबी कहानी है। (Vegetable grafting benefit)

विदेशी शिक्षा और स्वदेशी मिट्टी का अनूठा संगम

मोहित की यह यात्रा साल 2011 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने 3 एकड़ जमीन पर पॉली हाउस लगाकर फूलों की खेती शुरू की। हालांकि, शुरुआती वर्षों में चुनौतियां बहुत थीं। इसी बीच उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जाकर हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से विशेष ट्रेनिंग ली। वहां उन्होंने देखा कि कैसे विकसित देशों में कम जमीन पर वैज्ञानिक तरीकों से बंपर पैदावार ली जाती है। 2019-20 में वापस लौटकर उन्होंने अपनी ‘हाई-टेक नर्सरी’ की नींव रखी। उन्होंने महसूस किया कि भारत में किसान पारंपरिक बीजों और कमजोर पौधों की वजह से पिछड़ रहे हैं, और इसी कमी को उन्होंने अपना बिजनेस मॉडल बनाया। (सब्जी नर्सरी बिजनेस मॉडल)

ग्राफ्टिंग तकनीक: खेती की नई संजीवनी

मोहित की सफलता का सबसे बड़ा आधार ग्राफ्टिंग विधि है। हरियाणा में ग्राफ्टिंग के जरिए सब्जियों की नर्सरी तैयार करने वाली यह एकमात्र और सबसे बड़ी इकाई है। (हरियाणा आधुनिक खेती समाचार)

ग्राफ्टिंग का विज्ञान क्या है? इस तकनीक में एक जंगली और बेहद मजबूत जड़ वाले पौधे के ऊपर उच्च गुणवत्ता वाली सब्जी की कलम जोड़ी जाती है। इसे साधारण भाषा में पौधों का ऑपरेशन भी कह सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता: ग्राफ्टेड पौधों की जड़ें मिट्टी में होने वाली बीमारियों और फंगस के प्रति बेहद प्रतिरोधी होती हैं।

लंबी उम्र और उत्पादन: साधारण पौधा जहां 3-4 महीने फल देता है, वहीं ग्राफ्टेड पौधा 6 से 8 महीने तक भरपूर पैदावार देता है।

मजबूत ढांचा: ये पौधे प्रतिकूल मौसम, पाला और भारी बारिश को झेलने में अधिक सक्षम होते हैं।

हाई-टेक लैब और आधुनिक तापमान नियंत्रण प्रणाली

सर्दियों के मौसम में उत्तर भारत के किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या पाला और अत्यधिक ठंड होती है, जिससे नर्सरी बर्बाद हो जाती है। मोहित ने इसका समाधान अपने फार्म पर एक अत्याधुनिक लैब और तापमान नियंत्रण प्रणाली (Temperature Control System) स्थापित करके निकाला है।

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