दुबले-पतले हैं तो भी सावधान! क्या आपके पेट में भी छिपी है कातिल चर्बी? डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया भारतीयों के लिए बड़ा खतरा

health tips in hindi नई दिल्ली | आज के दौर में हम अक्सर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का अंदाजा उसके बाहरी शरीर को देखकर लगाते हैं। अगर कोई व्यक्ति मोटा नहीं दिख रहा, तो हम मान लेते हैं कि वह फिट है। लेकिन विज्ञान और चिकित्सा जगत की नई रिसर्च इस धारणा को पूरी तरह से ध्वस्त कर रही है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में नई दिल्ली में ‘हृदय रोग में मोटापा और लिपिड प्रबंधन’ (Advances in Obesity and Lipid Management in CVD) पर एक व्यापक पाठ्यपुस्तक का विमोचन करते हुए एक ऐसी चेतावनी दी है, जो हर भारतीय को चौंका सकती है। (Hindi News Today)

डॉ. सिंह के अनुसार, पूरे मोटापे (General Obesity) की तुलना में पेट का मोटापा (Central Obesity) एक बहुत बड़ा जोखिम है। विशेष रूप से भारत जैसे देश में, जहां लोग बाहर से दुबले-पतले (Skinny) दिखते हैं, लेकिन उनके शरीर के अंदर खतरनाक स्तर तक वसा (Internal Fat) जमा होती है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं। (Dr Jitendra Singh Health News 2026)

स्किनी फैट: भारतीयों के लिए एक अनसुलझी पहेली

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जिस मुख्य बिंदु पर जोर दिया, वह है भारतीय शारीरिक संरचना (Phenotype) की विशिष्टता। पश्चिमी देशों में मोटापा अक्सर पूरे शरीर पर समान रूप से दिखता है, लेकिन भारतीयों में ‘टॉफी’ (TOFI – Thin Outside, Fat Inside) की समस्या आम है। यानी व्यक्ति बाहर से तो पतला दिखता है, लेकिन उसके आंतरिक अंगों के आसपास ‘विसेरल फैट’ (Visceral Fat) जमा होता है।

पेट की चर्बी क्यों है ‘साइलेंट किलर’?

डॉ. के अनुसार, पेट के आसपास जमा यह आंतरिक वसा केवल कॉस्मेटिक समस्या नहीं है। यह चर्बी मेटाबॉलिक रूप से बहुत सक्रिय होती है और ऐसे रसायन (Cytokines) छोड़ती है जो शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं। डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि भले ही आपका बीएमआई (BMI) सामान्य हो, लेकिन अगर आपकी कमर का घेरा ज्यादा है, तो आप मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (Hypertension), हृदय रोग और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियों के सीधे निशाने पर हैं।

सेंट्रल ओबेसिटी और हृदय रोगों का गहरा नाता

लोकार्पण समारोह के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि शरीर के मध्य भाग का मोटापा हृदय संबंधी रोगों (CVD) का एक स्वतंत्र जोखिम कारक है। इसका मतलब है कि अगर आपको और कोई बीमारी नहीं भी है, तो भी सिर्फ पेट की चर्बी आपके दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है।

चयापचय संबंधी विकार (Metabolic Disorders): जब पेट के अंगों जैसे लिवर, पैनक्रियाज और आंतों के आसपास चर्बी जमा होती है, तो यह ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ पैदा करती है। यही वह स्थिति है जहाँ से टाइप-2 डायबिटीज की शुरुआत होती है। इसके अलावा, यह ‘डिस्लिपिडेमिया’ (खून में खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना) का कारण बनती है, जो सीधे तौर पर धमनियों को ब्लॉक कर देता है।

युवाओं में बढ़ता हार्ट अटैक: क्या जिम जाना ही काफी है?

लेख में एक बहुत ही महत्वपूर्ण एंगल युवाओं की जीवनशैली पर दिया गया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने संतुलित स्वास्थ्य प्रथाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजकल फिटनेस के प्रति एक ‘अवैज्ञानिक दृष्टिकोण’ अपनाया जा रहा है।

अत्यधिक परिश्रम का जोखिम: बिना पर्याप्त तैयारी, वार्म-अप या आराम के जिम में अत्यधिक एक्सरसाइज करना दिल पर भारी पड़ रहा है।

शारीरिक संतुलन की कमी: युवा आबादी में टाइप-2 मधुमेह और कम उम्र में हृदय संबंधी जटिलताओं के पीछे केवल डाइट ही नहीं, बल्कि ‘शारीरिक संतुलन’ की कमी और तनाव भी बड़े कारण हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि फिटनेस का मतलब सिर्फ डोले-शोले बनाना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से निर्देशित निवारक देखभाल (Preventive Care) और निरंतर अनुशासन है।

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