HBSE Breaking News:1173 केंद्रों पर छापेमारी, 16 छात्रों पर गिरी गाज, लापरवाही पर एक सुपरवाइजर नपा

HBSE Breaking News भिवानी । हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) की सीनियर सैकेण्डरी परीक्षाओं में अब नकल केवल एक छात्र की गलती नहीं, बल्कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की जवाबदेही भी बन गई है। सोमवार को रसायन विज्ञान (Chemistry), लेखांकन (Accountancy) और लोक प्रशासन जैसे विषयों की परीक्षा के दौरान बोर्ड प्रशासन ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी की। प्रदेश के 1173 परीक्षा केंद्रों पर एक साथ हुए इस एक्शन ने नकल माफिया के पसीने छुड़ा दिए। आज की कार्रवाई में जहां 16 छात्र नकल करते पकड़े गए, वहीं गुरुग्राम में ड्यूटी में ढिलाई बरतने वाले एक सुपरवाइजर (पीटीआई) को तुरंत पद से हटा दिया गया।

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सोमवार को सीनियर सैकेण्डरी के करीब 95,162 परीक्षार्थी केंद्रों पर पहुंचे थे। लेकिन इस बार नजारा कुछ बदला हुआ था। बोर्ड सचिव मुनीश शर्मा (IAS) और बोर्ड उपाध्यक्ष सतीश शाहपुर ने केवल दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट नहीं ली, बल्कि खुद गाड़ियों के काफिले के साथ परीक्षा केंद्रों पर जा धमके। फरीदाबाद से लेकर गुरुग्राम के पटौदी तक, बोर्ड की फ्लाइंग ने हर बेंच और हर डेस्क की तलाशी ली। गुरुग्राम के अलावलपुर-2 केंद्र पर जब एसटीएफ-5 की टीम पहुंची, तो वहां तैनात पर्यवेक्षक सुरेंद्र सिंह (पीटीआई) को ड्यूटी के प्रति लापरवाह पाया गया। बोर्ड ने बिना समय गंवाए उन्हें कार्यभार मुक्त (रिलीव) कर दिया। यह इस सत्र की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

क्यों बदली बोर्ड ने अपनी रणनीति?

हरियाणा बोर्ड की साख पिछले कुछ सालों में सामूहिक नकल की तस्वीरों के कारण काफी प्रभावित हुई थी। नूंह, सोनीपत, झज्जर और रोहतक के कुछ केंद्रों से ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं जहां लोग दीवारों पर चढ़कर नकल करवाते दिखते थे। बोर्ड की इस बदनामी का असर यहां के मेधावी छात्रों पर पड़ता था, जिन्हें बाहरी राज्यों के कॉलेज शक की निगाह से देखते थे।
साख बचाने की लड़ाई: बोर्ड सचिव मुनीश शर्मा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड का ध्येय केवल परीक्षा संपन्न कराना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी वातावरण तैयार करना है। अब तक नकल नहीं रुकेगी, तब तक हरियाणा के शिक्षा मॉडल को सम्मान नहीं मिलेगा।
पुराने मामलों से ली सीख: पिछले वर्षों में कई बार परीक्षा केंद्र रद्द करने पड़े थे। इस बार बोर्ड ने प्रिवेंटिव एक्शन (बचाव कार्य) लिया है। एसटीएफ की तैनाती और अधिकारियों का खुद ग्राउंड पर उतरना यह सुनिश्चित करता है कि स्थानीय स्तर पर कोई सेटिंग न हो सके।

पिछला रिकॉर्ड: नकल की पुरानी बीमारी और नया इलाज

2023-24 के सत्र में: सैकड़ों छात्रों के खिलाफ UMC (Unfair Means Case) बनाए गए थे और कुछ केंद्रों पर तो पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा था।
2025 की परीक्षाओं में: डिजिटल नकल और व्हाट्सएप पर पेपर लीक होने की अफवाहों ने बोर्ड की नींद उड़ाई थी।
नया बदलाव: इस बार बोर्ड ने तकनीक और सख्त अनुशासन का मेल किया है। 1173 केंद्रों पर सीसीटीवी और फ्लाइंग स्क्वॉड की ऐसी लेयर बनाई गई है कि नकलचियों के पास बचने का रास्ता बहुत कम है।

एक्सप्लेनर: एक सुपरवाइजर को हटाना क्या संदेश देता है?

अक्सर केंद्रों पर यह देखा जाता था कि, स्थानीय पर्यवेक्षक अपने परिचित छात्रों या दबाव में आकर नकल की अनदेखी करते थे। गुरुग्राम में पीटीआई सुरेंद्र सिंह पर हुई कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों और स्टाफ को अलर्ट कर दिया है। संदेश साफ है, अगर आपके कमरे में नकल की पर्ची मिली, तो छात्र के साथ-साथ आपकी नौकरी पर भी आंच आएगी। यह जवाबदेही ही इस बार के परीक्षा संचालन की सबसे बड़ी वैल्यू है।

11 मार्च की चुनौती: अब नजर कंप्यूटर विज्ञान पर

आज की कार्रवाई के बाद बोर्ड का पूरा फोकस अब 11 मार्च 2026 को होने वाली अगली परीक्षा पर है। इसमें कंप्यूटर विज्ञान, आईटी और डीएलएड की परीक्षा होगी। इस परीक्षा में 13,186 परीक्षार्थी शामिल होंगे। आईटी जैसे विषयों में अक्सर छात्र हाई-टेक तरीके या गैजेट्स के जरिए नकल की कोशिश करते हैं। बोर्ड के प्रवक्ता ने बताया कि इसके लिए बोर्ड की आईटी विंग और स्पेशल फ्लाइंग टीमें पहले से ही संवेदनशील केंद्रों की लिस्ट तैयार कर चुकी हैं।

जानिए, क्या कहते हैं जानकार?

बोर्ड के एक विशेषज्ञ कहते हैं कि, हरियाणा बोर्ड का यह सख्त रुख राज्य की रैंकिंग सुधारने में मदद करेगा। रेवाड़ी और आसपास के जिलों में भी इस बार नकल के मामलों में भारी कमी देखी गई है, जिसका श्रेय बोर्ड की नई मॉनिटरिंग प्रणाली को जाता है।

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