Group-D Training Haryana- हरियाणा के स्कूलों में अब ग्रुप-डी कर्मचारी भी बनेंगे साहब जैसे स्मार्ट, सर्विस रूल से लेकर कानून तक की मिलेगी ट्रेनिंग

Group-D Training Haryana चंडीगढ़ । हरियाणा के सरकारी स्कूलों और दफ्तरों में काम करने वाले हमारे ग्रुप-डी (चतुर्थ श्रेणी) कर्मचारी भाई-बहनों के लिए एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर आई है। अब तक जिन्हें सिर्फ चपरासी या सफाई कर्मचारी समझा जाता था, सरकार अब उन्हें प्रोफेशनल बनाने जा रही है। इसका मतलब यह है कि अब ग्रुप-डी कर्मचारी भी वैसे ही नियम-कायदे और तौर-तरीके सीखेंगे जैसे बड़े अधिकारी सीखते हैं। शिक्षा विभाग ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसमें रेवाड़ी जिले के 167 ग्रुप-डी कर्मचारियों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग SCERT गुरुग्राम और डाइट (DIET) रेवाड़ी की देखरेख में होगी।

क्यों पड़ी इस ट्रेनिंग की ज़रूरत?

अक्सर देखा जाता है कि स्कूलों में ग्रुप-डी कर्मचारी सबसे ज़्यादा काम करते हैं, लेकिन उन्हें सरकारी नियमों (Service Rules) की पूरी जानकारी नहीं होती। कई बार उन्हें डिजिटल काम (कंप्यूटर या मोबाइल) में दिक्कत आती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने तय किया है कि इन कर्मचारियों को केवल काम ही नहीं, बल्कि उनके अधिकार और कानून की जानकारी भी दी जाए। डाइट के प्राध्यापक और मास्टर ट्रेनर सत्यपाल यादव ने बताया कि यह ट्रेनिंग मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो 2018 के बाद भर्ती हुए हैं। नए ज़माने के हिसाब से इन कर्मचारियों को तैयार करना ज़रूरी है।

दो चरणों में होगी ट्रेनिंग, तारीख नोट कर लें

पहला बैच: 16 मार्च से 20 मार्च तक।
दूसरा बैच: 24 मार्च से 28 मार्च तक (यह उन लोगों के लिए है जिनकी ड्यूटी अभी बोर्ड की परीक्षाओं में लगी है)।

ट्रेनिंग में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

इस 5 दिन की ट्रेनिंग में कर्मचारियों को चार मुख्य बातें सिखाई जाएंगी, जो उनके जीवन और नौकरी दोनों में काम आएंगी।
सरकारी नियम और कानून (सर्विस रूल्स): बहुत से कर्मचारियों को पता ही नहीं होता कि उनकी छुट्टियाँ कितनी हैं, उनके क्या हक हैं और उन्हें दफ्तर में कैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्हें आचार संहिता सिखाई जाएगी ताकि वे अपनी नौकरी को और बेहतर तरीके से समझ सकें।
बच्चों की सुरक्षा और पॉक्सो (POCSO) एक्ट: यह इस ट्रेनिंग का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। स्कूलों में बच्चे होते हैं, इसलिए हर कर्मचारी को पॉक्सो एक्ट और पॉश (POSH) कानून की जानकारी होनी चाहिए। उन्हें बताया जाएगा कि बच्चों के साथ कैसा बर्ताव करना है और स्कूल में सुरक्षित माहौल कैसे बनाना है। इससे कर्मचारी खुद भी कानूनी पचड़ों से बचेंगे और बच्चों की भी सुरक्षा होगी।
कंप्यूटर और मोबाइल का ज्ञान (डिजिटल साक्षरता): आजकल सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। हाजिरी से लेकर फाइलों का काम भी डिजिटल हो रहा है। ट्रेनिंग में उन्हें साइबर सुरक्षा के बारे में बताया जाएगा ताकि उनके साथ कोई ऑनलाइन ठगी न हो और वे दफ्तर के डिजिटल काम में मदद कर सकें।
बोलने का तरीका और फर्स्ट एड (First Aid): दफ्तर में आने वाले लोगों से कैसे बात करनी है (Communication Skills), टीम में मिलकर कैसे काम करना है और अगर स्कूल में किसी को चोट लग जाए तो प्राथमिक उपचार कैसे देना है, ये सब बातें भी सिखाई जाएंगी।

Leave a Comment

New Update WhatsApp Join WhatsApp