Gas crisis in rajasthan जयपुर | राजस्थान में एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने व्यापारियों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। भजनलाल सरकार ने बहुत बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए पूरे राज्य में कमर्शियल गैस सिलेंडरों (19 किलो वाले नीले सिलेंडर) की बिक्री और नई सप्लाई पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है। इस फैसले के पीछे कोई छोटी-मोटी वजह नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचा हुआ भारी घमासान है। दुनिया के नक्शे पर ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग का सीधा असर अब राजस्थान के बाज़ारों और रसोइयों पर दिखने लगा है।राजधानी समेत प्रदेश के तमाम जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर सन्नाटा पसरा है, और गोदामों में ताले लटक रहे हैं। तेल कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं और सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए गैस की राशनिंग शुरू कर दी है। (Gas crisis in rajasthan)
युद्ध का असर: आखिर क्यों खाली हुए राजस्थान के गैस डिपो?
भारत अपनी जरूरत की सबसे ज्यादा एलपीजी गैस खाड़ी देशों से मंगवाता है। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने इस पूरी सप्लाई चेन को तहस-नहस कर दिया है। आप इस तरह समझ सकते हैं कि जिस समुद्री रास्ते से गैस लेकर जहाज भारत आते हैं, उसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य कहा जाता है। युद्ध के कारण इस रास्ते की घेराबंदी हो चुकी है और मिसाइल हमलों के डर से मालवाहक जहाजों ने वहां से आना बंद कर दिया है। जो जहाज समुद्र के बीच में फंसे हैं, उन्हें सुरक्षा के लिहाज से रास्ता बदलकर बहुत दूर से आना पड़ रहा है। इससे न केवल समय लग रहा है, बल्कि गैस की लागत भी कई गुना बढ़ गई है। तेल कंपनियों के पास स्टॉक खत्म हो चुका है, जिसके कारण जयपुर और राजस्थान के अन्य बड़े शहरों में सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है।

सरकार का कड़ा रुख: अब 25 दिन में मिलेगा घरेलू सिलेंडर (Gas crisis in rajasthan)
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस आपात स्थिति को देखते हुए रसद विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक की है। सरकार की पहली प्राथमिकता आम जनता की घरेलू रसोई को चालू रखना है। इसलिए सरकार ने फैसला लिया है कि जो भी गैस का स्टॉक बचा है, वह सिर्फ 14.2 किलो वाले घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जाएगा। सरकार ने घरेलू गैस की कालाबाजारी और फिजूलखर्ची रोकने के लिए नया नियम भी लागू कर दिया है। अब एक सिलेंडर लेने के बाद उपभोक्ता को दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह समय सीमा 21 दिन थी। सरकार का मानना है कि गैस की खपत कम होगी और संकट के समय में हर घर को चूल्हा जलाने का मौका मिलेगा।
व्यापारियों में हाहाकार: शादियों का सीजन और सूने पड़े चूल्हे
राजस्थान में इस समय शादियों का सबसे बड़ा सीजन चल रहा है। 10 मार्च की यह तारीख शादियों के लिए बहुत खास है, लेकिन गैस की किल्लत ने कैटरर्स और हलवाइयों की नींद उड़ा दी है।
कैटरिंग और शादियां: एक औसत शादी में 30 से 40 कमर्शियल सिलेंडरों की खपत होती है। अब जब सप्लाई ही बंद है, तो हलवाई लकड़ियों और कोयले का जुगाड़ करने में लगे हैं।
होटल और रेस्टोरेंट: जयपुर के बड़े-बड़े रेस्टोरेंट से लेकर सड़क किनारे लगे ढाबों तक, हर जगह गैस संकट का असर दिख रहा है। कई जगहों पर बोर्ड लग गए हैं कि गैस न होने के कारण खाना नहीं बन पाएगा।
महंगाई और कालाबाजारी: गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ दलाल सक्रिय हो गए हैं। जो सिलेंडर पहले 2500-2600 रुपये का मिलता था, उसे अब चोरी-छिपे 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी दुकानदार या सप्लायर ब्लैक में गैस बेचता पाया गया, उस पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी।
Gas crisis in rajasthan–आम आदमी की भाषा में समझिए, ये संकट क्या है?
सीधी और सरल बात ये है कि हम जो गैस इस्तेमाल करते हैं, वो हमारे देश में बहुत कम बनती है। हम उसे विदेशों से खरीदते हैं। अब जहां से ये गैस आती है, वहां दो पड़ोसियों (ईरान-इजरायल) के बीच लाठी-गोली चल रही है। समंदर के रास्ते बंद हैं, इसलिए गैस लेकर आने वाले ट्रक या जहाज हमारे पास नहीं पहुँच पा रहे। जब दुकान पर सामान ही नहीं आएगा, तो दुकानदार (सरकार) बेचेगा क्या? इसीलिए सरकार ने कहा है कि पहले घरों में खाना बने, होटलों और दुकानों की गैस पर कुछ दिन का ब्रेक लगाते हैं।