23 March Holiday in Punjab चंडीगढ़ | पंजाब सरकार ने यानी 23 मार्च (सोमवार) को शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के ‘शहीदी दिवस’ के अवसर पर पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया है। इस दिन राज्य के सभी स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। लेकिन यह छुट्टी सिर्फ एक अवकाश नहीं, बल्कि उन तीन महानायकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। (Punjab News, Hindi News Today)
इतिहास के पन्नों से: 23 मार्च 1931 की वो खौफनाक रात
एक इतिहासकार के मुताबिक, इतिहास गवाह है कि, अंग्रेजों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने के लिए 24 मार्च 1931 की सुबह का वक्त तय किया था। लेकिन अंग्रेज इन क्रांतिकारियों की लोकप्रियता से इतना डर गए थे कि, उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर 11 घंटे पहले यानी 23 मार्च की शाम 7:33 बजे ही तीनों को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी।
क्यों मिली थी फांसी? इन तीनों वीरों पर लाहौर षड्यंत्र केस और सॉन्डर्स की हत्या का आरोप था।
इंकलाब का नारा: फांसी के फंदे को चूमते वक्त भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। जेल की कोठरी से लेकर फांसी के तख्ते तक ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे गूंज रहे थे। (Shaheed Diwas 23 March 2026 Punjab)
अंतिम संस्कार का डर: फांसी के बाद अंग्रेजों ने उनके शवों को पिछले दरवाजे से बाहर निकाला और सतलुज नदी के किनारे फिरोजपुर में गुप्त रूप से जलाने की कोशिश की, जिसे बाद में लोगों के विरोध के कारण अधूरा छोड़ना पड़ा।
पंजाब में छुट्टी की शुरुआत और महत्व
पंजाब की मिट्टी इन शहीदों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। शहीद भगत सिंह का पैतृक गांव खटकड़ कलां (नवांशहर) आज भी देशभक्ति का केंद्र है।