10 April History Special | इतिहास की परतें जब खुलती हैं, तो कुछ तारीखें किसी डरावने मंज़र की तरह सामने आती हैं, तो कुछ गर्व से सीना चौड़ा कर देती हैं। 10 अप्रैल का इतिहास (10 April ka Itihas) भी कुछ ऐसा ही है। यह वह दिन (Aaj kya hai) है, जिसने दुनिया को कभी न डूबने वाले जहाज का अहंकार टूटते हुए दिखाया, तो भारत की सोई हुई आत्मा को गांधी के सत्याग्रह के जरिए जगाया। विज्ञान की दुनिया के लिए यह दिन इसलिए अमर हो गया, क्योंकि इसी दिन हमने उस ब्लैक होल को पहली बार देखा, जिसके बारे में इंसान सदियों से केवल कल्पना ही कर रहा था। Titanic 10 April 1912
आइए, 10 अप्रैल की उन 10 बड़ी और निर्णायक ऐतिहासिक घटनाओं का गहराई से विश्लेषण करते हैं, जिन्होंने आज की दुनिया को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई। पढ़िए, सभी 10 बड़ी घटनाएं बिल्कुल आसान भाषा में। Champaran Satyagraha
पहलीः 1912: अहंकार और त्रासदी की शुरुआत, टाइटैनिक की पहली और अंतिम यात्रा
इतिहास की सबसे प्रसिद्ध और दुखद समुद्री घटनाओं में से एक, RMS Titanic का सफ़र आज ही के दिन शुरू हुआ था। 10 अप्रैल 1912 को इंग्लैंड के साउथेम्प्टन बंदरगाह पर हज़ारों की भीड़ इस इंजीनियरिंग के अजूबे को विदा करने जुटी थी। उस वक्त के अख़बारों ने इसे ‘अजेय’ (Unsinkable) घोषित कर दिया था।
करीब 882 फीट लंबे और 46,000 टन वजनी इस जहाज़ पर दुनिया के सबसे अमीर लोग सवार थे। टाइटैनिक की विदाई के पीछे की असल कहानी यह थी, कि इंसान ने तकनीक पर इतना भरोसा कर लिया था, कि पर्याप्त लाइफबोट तक नहीं रखी गई थीं। विडंबना देखिए, जिस जहाज़ ने आज सुबह 10 अप्रैल को जश्न के साथ न्यूयॉर्क के लिए लंगर उठाया था, वह महज 4 दिन बाद यानी 14-15 अप्रैल की रात को अटलांटिक की गहराई में 1500 से ज़्यादा ज़िन्दगियों को लेकर समा गया। 10 अप्रैल का दिन हमें याद दिलाता है कि प्रकृति के सामने मानवीय तकनीक की एक सीमा है। Today History in Hindi
दूसरीः 1917: चंपारण की धरती पर गांधी का ‘धमाका’ – सत्याग्रह का जन्म
भारतीय स्वाधीनता संग्राम के नज़रिए से 10 अप्रैल वह दिन है, जब भारत को उसका सबसे बड़ा महानायक मिला। इसी दिन महात्मा गांधी बिहार के चंपारण जिले में पहुंचे थे। उस वक्त राजकुमार शुक्ल के बुलावे पर गांधीजी वहां नील की खेती करने वाले उन हज़ारों किसानों का दर्द सुनने आए थे, जिन्हें अंग्रेज तिनकठिया प्रथा के तहत निचोड़ रहे थे। 10 April History India and World
चंपारण सत्याग्रह केवल एक आंदोलन नहीं था; यह ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भारत का पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) था। गांधीजी ने इसी दिन से यह साबित करना शुरू किया, कि अहिंसा के मार्ग पर चलकर दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को भी झुकाया जा सकता है। इसी आंदोलन ने गांधी को ‘बापू’ और ‘महात्मा’ की पहचान दी और ब्रिटिश साम्राज्य के अंत की उलटी गिनती शुरू हुई।
तीसरीः 2019: ब्लैक होल की पहली तस्वीर, ब्रह्मांड के रहस्य से उठा पर्दा
10 अप्रैल 2019 को खगोल विज्ञान (Astronomy) की दुनिया में वह चमत्कार हुआ, जिसकी आइंस्टीन ने 100 साल पहले भविष्यवाणी की थी। आठ रेडियो टेलिस्कोप के नेटवर्क ‘इवेंट होराइजन टेलीस्कोप’ ने ब्लैक होल (M87) की पहली वास्तविक तस्वीर जारी की। यह ब्लैक होल पृथ्वी से 5.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है, और इसका द्रव्यमान सूर्य से 6.5 अरब गुना ज़्यादा है।
इस तस्वीर ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया, क्योंकि यह पहली बार था, जब इंसान ने एक ऐसी चीज़ को साक्षात देखा था, जो अपने भीतर प्रकाश तक को निगल लेती है। यह खोज महज़ एक फोटो नहीं थी, बल्कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति और समय (Time) की समझ को लेकर एक नई क्रांति थी।
चौथीः 1875: आर्य समाज की स्थापना,वेदों की ओर लौटो का शंखनाद
आधुनिक भारत के सामाजिक ढांचे को बदलने में 10 अप्रैल का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने बंबई (मुंबई) में ‘आर्य समाज’ की स्थापना की थी। उन्होंने मूर्ति पूजा, बाल विवाह और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार किया। दयानंद सरस्वती का ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा आज भी प्रासंगिक है। आर्य समाज ने भारत में स्वदेशी आंदोलन की अलख जगाई, और शिक्षा के क्षेत्र में (DAV संस्थानों के माध्यम से) जो योगदान दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।